
जमशेदपुरः विश्व हिंदू परिषद नेता संजय ठाकुर की हत्या कांड नौ दिन चले ढाई कोस वाली कहावत को ही चरितार्थ कर रही है. जी हां, इस हत्याकांड के नौ दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस सिर ही धुन रही है. किसी नतीजे पर पहुंच नहीं पायी है. कोई सुराग हाथ नहीं लगा है. हालांकि पुलिस ने मृतक की पत्नी संजना ठाकुर द्वारा लिखित बयान पर आदित्यपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली और मामले की छानबीन कर रही है, लेकिन नौ दिन बीत जाने के बाद भी सुराग हाथ नहीं लगा है.
गौरतलब है कि विगत 6 जून 2015 से संजय ठाकुर का शव सुवर्णरेखा नदी के बीच मौजूद जलकुंभी के बीच से मिला था. दो दिन तक शव इसलिए पड़ा रहा कि दो थानो के सीमा विवाद में उलझ गया था. बाद में कदमा थाना पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम कराया था. चूंकि मृतक संजय ठाकुर आदित्यपुर थाना क्षेत्र के सेवन एलएफ कॉलोनी का रहनेवाला था, इसलिए इस मामले को आदित्यपुर थाना पुलिस के पास भेज दिया गया. आदित्यपुर पुलिस ने पत्नी संजना ठाकुर के लिखित बयान के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है, लेकिन नौ दिन बीत जाने के बाद भी मामला ढाक के तीन पात ही साबित हो रहा है. इससे मृतक के परिजनों में काफी नाराजगी देखी जा रही है. जैसा कि विदित है कि घटना के दिन संजय ठाकुर अपनी नैनो कार से निकला था. इसके बाद वह अपने घर के लिए इंधन गैस लेकर आया था. उसके साथ कार में एक अंजान व्यक्ति भी था, जिसे परिवार वाले नहीं जानते थे और न ही कभी संजय के साथ उसे पहले देखा था. इसके बाद बिष्टुपुर स्थित गीतांजलि बार में अंतिम बार देखा गया. इसके बाद संजय की लाश नदी में मिली. हैरत की बात तो यह है कि पुलिस ने नौ दिन के बाद भी नैनो कार का भी पता नहीं लगा पायी है. यहां यह उल्लेखनीय है कि गीतांजलि बार में सीसीटीवी कैमरा भी लगा हुआ, जिसकी जांच भी नहीं की गयी है. साथ ही मैरिन ड्राइव में भी सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है, इसे भी पुलिस खंगाल नहीं रही है.
मृतक का साला नितिन कुमार झा का कहना है कि संजय का एक मित्र है, जिसका नाम यशवंत है, घटना के दिन टीएमएच के पास तीन युवकों को बैठा देखा था, जिसे वह संदिग्ध मान रहा है और वह उसका स्केच बनवा सकता है. उसका कहना है कि पुलिस को इस दिशा में भी देखना चाहिए.
उधर इस मामले में आदित्यपुर थाना प्रभारी अरविंद कुमार कहना है कि इस मामले में शक की सूई उसके दोस्तों पर ही है. लेकिन जब तक मजबूत सुराग हाथ नहीं लगता, तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता. उन्होंने एमजीएम की कार्यप्रणाली पर ही कड़ी प्रतिक्रिया जतायी, उनका कहना था कि इतना बड़ा एमजीएम कॉलेज है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने में दो माह से ज्यादा का वक्त लग जाता है. इससे भी जांच प्रभावित होती है. वैसे पुलिस इस मामले में जांच कर रही है. जल्द ही परिणाम सामने आयेगा.



