
राजेंद्र ‘राज‘ के रविन्द्र संगीत भोजपुरी एलबम में नहीं हैं फूहड़ता


जमशेदपुर। मातृभाषा भोजपुरी होते हुए भी आपने स्व. गुरु शान्तिदेव घोष एवं कोनिका बंदोपाध्याय के शिष्य गुरु समर सिन्हा जाना से विधिवत रविन्द्र संगीत (बांग्ला) की शिक्षा एवं बंगीय संगीत परिषद, कोलकाता यूनिवर्सिटी से ‘संगीत विभाकर‘ की डिग्री प्राप्त करने वाले परसुडीह सिनेमा रोड़ निवासी राजेंद्र साह ‘राज‘ द्धारा रविन्द्र संगीत भोजपुरी में तैयार किया गया 11 गीतों का एलबम ‘जागत बीतल रैन अरी‘ का लोकार्पण माइकल जॉन ओडोटोरियम, बिष्टुपुर में सम्पूर्ण भोजपुरी विकास मंच, जमशेदपुर द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव में किया गया। इस मौके पर प्रमुख रूप से मंत्री सरयू राय, भोजपुरी के ख्यातिप्राप्त कलाकार भरत शर्मा व्यास, राजेंद्र साह ‘राज‘ आदि शामिल थे।
इस अवसर पर मंत्री सरयू राय ने कहा कि आज भोजपुरी गीतों में फूहड़ता की बाढ़ सी आ गयी है ऐसी विषम परिस्थिति में जब भोजपुरी की प्रतिष्ठा ही दांव पर लगी हो यह 11 गीतों का एल्बम ‘जागत बीतल रैन अरी‘ रविन्द्र संगीत भोजपुरी में निश्चित रूप से अश्लीलता और फूहड़ता पर एक करारा तमाचा होगा। सभी गीत भाव पूर्ण हैं जिनमे गुरुदेव ने जीवन के सभी रंगों को उतारा है। भोजपुरी की गरिमा, प्रतिष्ठा को बनाये रखने के लिए भोजपुरी सभ्य समाज को अच्छे गीत, अच्छे गीतकारों को प्रोत्साहित करना चाहिए और फूहड़ लिखने और गाने वालों का बहिष्कार करना चाहिए ताकि हमारी मातृभाषा भोजपुरी की गरिमा बनी रहे।
मालूम हो कि देश में पहली बार बांग्ला रविन्द्र संगीत का अनुवाद कर राजेंद्र साह ‘राज‘ द्धारा रविन्द्र संगीत भोजपुरी में प्रस्तुत किया गया हैं। इन गीतों में आजकल के भोजपुरी गीतों की तरह तड़क भड़क का मसाला नहीं है किन्तु ऐसे लोग जो भोजपुरी को मातृभाषा का सम्मान देते हैं और स्वस्थ भोजपुरी गीत के हिमायती हैं निःसंदेह उन्हें अच्छी लगेगी। इन्हे भावपूर्ण मधुर संगीत के रूप में याद किया जा सकता है। साहित्य में नोबेल पुरस्कार प्राप्त रचनाओं के भावों का रसास्वादन भोजपुरी जगत के लोग भी कर सकेंगे। मूल रविन्द्र संगीत के भावों एवं धुन को यथावत रखते हुए केवल शब्दों को भोजपुरी में रखा गया है।

