
जमशेदपुर।19 जुलाई
जिला मे एक बच्चे की डेगू से मौत के बाद जिला प्रशासन की नींद खुल गई । बुधवार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त अमित कुमार ने डेंगू एवं अन्य वेक्टर जनित बीमारियों के निवारण एवं नियत्रण के लिए गठित जिला समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। उपायुक्त ने जिले में डेंगू के मामलों की समीक्षा बैठक में उपस्थित पदाधिकारीयों को डेंगू की रोकथाम हेतु मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि आने वाले सप्ताह में एकमात्र लक्ष्य है डेंगू से पीड़ित मरीजों का बेहतर उपचार करना और इसकी रोकथाम करने के प्रभावी उपाय अपनाना। इसके लिए व्यापक व्यवस्था की जाए जिससे डेंगू के मच्छरों का लार्वा न पनपने पाए।


उपायुक्त ने कहा कि सर्वप्रथम जिन क्षेत्रों से डेंगू के मामले प्रकाश में आए हैं उन्हीं क्षेत्रों में प्रभावी तरीके से चिकित्सा के उपाय किए जाएं। पुनः नए क्षेत्रों में डेंगू के मच्छर के लार्वा प्रसार को रोकने हेतु एहतियातन कदम अपनाएं जाए। बैठक के दौरान श्री कुमार ने डेंगू एवं अन्य वेक्टर जनित बीमारियों के निवारण एवं इन पर नियत्रण के बारे में जागरूकता बढाने के लिए आक्रामक प्म्ब् अभियान शुरू करने का निर्देश दिया। इसके लिए समाचार पत्रों, टी0वी0, एफ0एम0 चैनलो मे विज्ञापन के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का निर्देश उन्होंने दिया। साथ ही होर्डिंग, बैनर, हैण्डबिल, नुक्कड़ नाटक के द्वारा लोगों को इस विषय में जानकारी देने को कहा। उन्होंने कहा कि डेंगू के विषय में लोगों को जानकारी देने की व्यवस्था को बेहतर किया जाए। प्रिंट एवं इलेक्ट्राॅनिक मीडिया के जरिए जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए जाएं। वैसे क्षेत्रों में जहाँ 2011 से डेंगू के मामले प्रकाश में आए हैं वहाँ रोकथाम के सघन उपाय करने का निर्देश देते हुए उपायुक्त ने कहा कि घर-घर जाकर रूके हुए पानी की जाँच स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा की जाए। यदि परीक्षण के दौरान डेंगू का लार्वा पाया जाता है तो उसे निष्क्रिय करें। यदि उन्ही क्षेत्रों में इसकी पुनरावृत्ति होती है तो ऐसे मामलो में कड़ाई से निपटने की जरूरत बताते हुए रेड क्राॅस के माध्यम से न्यूनतम 500 रूपये का जुर्माना लगाने का निर्देश उन्होंने दिया।
उपायुक्त ने कहा कि वेक्टर-जन्य बीमारियों का सीजन शुरू होने से पूर्व ही प्रशासन के स्तर पर तैयारियों को बेहतर किया जाए। इसके लिए उन क्षेत्रों में जहाँ बड़े पैमाने पर शूकर-पालन की गतिविधि होती है और जो रिहायशी क्षेत्र के आस-पास अवस्थित हैं वहाँ के प्रगतिशील किसानों में श्रम् के प्रति जागरूकता लाना आवश्यक है। साथ ही बच्चों का श्रम् टीकाकरण प्राथमिकता के आधार पर कराने का निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिया।
इस बारे में वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के दौरान श्री कुमार ने स्वास्थ्य विभाग, तीनों अक्षेस, जुस्को की तैयारियों के सन्दर्भ में जानकारी ली और इसके साथ ही रोग के निवारण एवं नियत्रण और चिकित्सयीय प्रबन्धन के लिए तकनीकी दिशा निर्देश दिए। उपायुक्त ने डेंगू की रोकथाम हेतु पंचायत स्तर पर सहिया, जल सहिया सेविका, सहायिका को मुखिया के नेतृत्व में ग्राम स्वास्थ्य समिति के अन्तर्गत कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि डेंगू से निपटने के अपने प्रयासों को मजबूत करने के उद्देश्य से निगरानी और नैदानिक उपाय अपनाने के क्रम में बस्ती विकास समितियों को भी सीधे शामिल करे। इन रोगों के निवारण के लिए समुदाय की भागीदारी एवं सशक्तिकरण बेहद जरूरी है। श्री कुमार ने सभी हितधारकों से आक्रामक जागरूकता अभियान शुरू करने का आग्रह किया, जिससे कि लोगों को अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक निवारणकारी कदम उठाने के बारे मे पूरी जानकारी मिल सके।
उपायुक्त ने अधिकारियों एवं डिस्ट्रिक्ट वेक्टर बार्न डिसीज कन्ट्रोल कंसलटेंट को यह भी निर्देश दिया कि वे वास्तविक स्थिति के साथ-साथ इस दिशा में हो रही तैयारियों का जायजा लेने के लिए विभिन्न अस्पतालों का नियमित रूप से निरीक्षणात्मक दौरा करें तथा मौके पर ही तकनीकी मार्गदर्शन करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि अस्पतालों में डेंगू के मरीजों के लिए आईसोलेशन वार्ड, ब्लड प्लेटलेट एवं डेडिकेटेड मेडिकल टीम कार्यरत हो। उन्होंने कहा कि स्कूलो में कक्षा आठ, नौ, दसवी के छात्रों को डेंगू से बचाव के बारे में प्रशिक्षित किया जाए।
उक्त बैठक में जिला परिषद अध्यक्षा सिविल सजर्न, ए0डी0एम0 विधि-व्यवस्था, एस0डी0ओ0 धालभूमगढ़ तथा अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

