वामन अवतार प्रसंग पर भाव विभोर हुए श्रद्धाल
परसुडीह में भागवत कथा का पांचवा दिन
जमशेदपुर। परसुडीह सोसाइटी काॅलोनी स्थित श्री शिव दुर्गा हनुमान मंदिर में चल रहे भागवत कथा सप्ताह के पांचवें दिन रविवार को कथावाचक आचार्य प्रसन्न कुमार शास्त्री ने वामन अवतार और श्री कृष्ण जन्मोत्सव की कथा का प्रसंग सुनाया तो श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि वामन विष्णु के 5 वें तथा त्रेता युग के पहले अवतार थे। यह ऐसे अवतार थे जो मानव शरीर में बौने ब्राह्मण के रुप में प्रकट हुए। भगवान बामन 52 अंगुल का रूप धारण करके प्रकट हुए और भगवान राजा बलि के द्वार पर पहुंचे और तीन पग भूमि दान की याचना की। राजा बली ने वामन से छोटे रुप में देख कर भूमि दान करने के लिए सहर्ष राजी हो गए थे। लेकिन भगवान ने विशाल रुप धर कर दो पग में सारे लोक नाप दिया। भगवान तीसरा कदम उठा ही रहे थे कि राजा बलि को गलती का अहसास हुआ और महाबली ने सृष्टि को बचाने के लिए प्रभु के आगे सिर झुका दिया। वामन अवतार ने उसका सिर नीचे की ओर दबाया और फिर दबाता ही चला गया जब तक कि महाबली धरती के नीचे पाताल नहीं पहुंच गए। भगवान श्री कृष्ण के जन्म पर प्रकाश डालते हुए आचार्य ने कहा कि धरती पर जब जब पाप बढ़ता है तब भगवान को अवतार लेना पड़ता है। जब कंस के अत्याचारों से चारों तरफ पाप बढ़ने लगा तो भगवान कृष्ण बाल रूप में माता देवकी के जन्म लेकर यशोदा मैया के घर पर यशोदा का पुत्र बनकर धरती पर आए पापियों का संहार किया। जिस समय भगवान का जन्म हुआ, जेल के ताले टूट गये और सभी पहरेदार अचेत हो गये। बासुदेव जी एवं देवकी बंधप मुक्त हो गये। यह सब प्रभु की कृपा से ही संभव हो सका। इसलिए कृपा नहीं होने पर प्रभु मनुष्य को सभी सुखों से वंचित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन आदमी को बार-बार नहीं मिलता है। इसलिए इस कलयुग में दया, धर्म व भगवान के स्मरण से ही सारी योनियों को पार करते हुए मनुष्य जीवन का महत्व समझते हुए भगवान भक्ति में अधिक से अधिक समय देना चाहिए। उन्होंने भगवान कृष्ण के जन्म का वर्णन कर श्रोताओं का मन मोह लिया।




