जमशेदपुर।यूनिसेफ एवं नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के इंटरनश (Interns) के द्वारा बाल गृह, संप्रेक्षण गृह एवं विशेष दत्तक ग्रहण-सहयोग विलेज का निरीक्षण किया गया। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से आए लोगों का मुख्य उद्देश्य चिल्ड्रन होम या देखरेख संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को कितनी जानकारी किशोर न्याय अधिनियम का है, कर्मचारियों की स्थिति क्या है, बच्चों के साथ व्यवहार इनका कैसा है, और कर्मचारियों के लिए क्या व्यवस्था की जाए ताकि वह बच्चों के लिए और अच्छे से कार्य कर सकें। इसको देखते हुए अपना रिपोर्ट तैयार करना था। यूनिसेफ एवं नेशनल यूनिवर्सिटी के द्वारा कुछ जिला का चयन किया गया है जिसमें जाकर निरीक्षण करके वहां की स्थिति से अवगत होते हुए वहां और क्या व्यवस्था की जा सकती है ताकि बच्चों के लिए और अच्छे से कार्य किया जा सके। इनके द्वारा अब तक कुछ जिलों- रांची, हजारीबाग का निरीक्षण भी किया गया है और कुछ जिलों कोडरमा, खूंटी का निरीक्षण बाकी है। निरीक्षण के दौरान यूनिसेफ के कंसलटेंट श्री धर्मेंद्र,नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से विजेता सिंह, लॉ यूनिवर्सिटी के इंटर -मेहुल मयंक, कुमार ऋषभ, अमित यादव, हसन अल बन्ना, रिया महतो, मंजूलिका होरो, दीपिका सिंह, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी डॉक्टर चंचल कुमारी, किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान दंडाधिकारी-श्वेता कुमारी, सदस्य-कुमार महेश संप्रेषण गृह एवं बाल गृह के अधीक्षक सह प्रभारी गृहपति- दुर्गेश नंदिनी,अध्यक्ष बाल कल्याण समिति-पुष्पा रानी तिर्की, सदस्य बाल कल्याण समिति-पवन कुमार, आलोक भास्कर, लकी दास, जिला बाल संरक्षण इकाई से सुनील प्रसाद-LPO, एम रवि शास्त्री-संरक्षण पदाधिकारी संस्थागत देखरेख, विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी से मैनेजर गुरविंदर कौर, सामाजिक कार्यकर्ता हरप्रीत सिंह, संप्रेक्षण गृह एवं बाल गृह के प्रतिनियुक्त शिक्षक एवं बाल गृह के अन्य कर्मचारी भी उपस्थित थे



