वेस्ट बोकारो में निर्मित की वर्षा जल संचयन पर आधारित अपने प्रकार की एकमात्र पेयजल परियोजना
जमशेदपुर।
टाटा स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन ने वर्षा जल संचयन पर आधारित अपने प्रकार की एकमात्र पेयजल परियोजना का निर्माण किया है। इस परियोजना से झारखंड के रामगढ़ जिला के आठ गांवों के 800 से अधिक लोगों को फायदा हो रहा है। परियोजना के तहत बोकारो नदी के तट पर जल ग्रहण के लिए एक कुआं के साथ एक चेक डैम का निर्माण किया गया है। यह पुनर्भरण (रिचार्ज) ढांचा नदी के ऊपरी मुख्य धारा में बिना कोई बाधा डाले नदी-तल के जल का इस्तेमाल करता है। तत्पश्चात कुआं में एकत्र जल को निथार कर और क्लोरीन के साथ उपचारित कर करीब 14 किलोमीटर में फैले पाइप के एक नेटवर्क के माध्यम से गांवों तक पहुंचाया जायेगा। इस पहल से गर्मी के दिनों में जब नदी पूरी तरह सूख जाती है, तब भी जलापूर्ति संभव होगी। इस प्रकार ग्रामीणों को पूरे वर्ष जल उपलब्ध होगा। यह परियोजना प्रतिदिन 1000 किलोलीटर जल आपूर्ति करने की क्षमता रखती है, जो इस क्षेत्र में गावों की जरूरतों की पूर्ति के लिए पर्याप्त है।
वेस्ट बोकारो डिवीजन के आसपास के गांवों में पेयजल की किल्लत एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि इन गांवों में जलवाही स्तर काफी नीचे है। सामान्य स्थितियों में भी यही हाल रहता है। इसलिए टाटा स्टील की सीएसआर गतिविधियों का एक फोकस क्षेत्र है। लोगों को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की इस परियोजना में कंपनी ने 4.19 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
इस परियोजना के माध्यम से पीने योग्य जल की सुविधा मिलेगी, जिससे इस क्षेत्र में जल-जनित रोगों में कमी आयेगी। बरसात में नदी में बार-बार अचानक आने वाली बाढ़ से परियोजना को बचाने के लिए नदी के
किनारे एक ऊंची दीवार बनायी गयी है। परियोजना स्थल को मनोरम बनाने के लिए यहां एक आकर्षक झरना और एक खूबसूरत पार्क भी निर्मित किये गये हंै।
अंतग्र्रहण कुआं में उचित जल स्तर कायम रखने और कृत्रिम जलवाही संरचना के रिचार्ज के लिए में जल का विवेकपूर्ण इस्तेमाल किया गया है, जो अन्यथा नदी के साथ बह जाते थे।
टाटा स्टील आसपास के कई गांवों में जलापूर्ति के विस्तार के लिए, जहां जल का थोड़ा बहुत भी स्रोत उपलब्ध है, वहां पाइप का जाल, बोर वेल व ट्यूब वेल स्थापित कर पर्याप्त आधारभूत संरचनाएं प्रदान कर रही है। वर्तमान में टाटा स्टील दुनी, झरनाबस्ती, जोंगरागोड़ा, लातुंगरी, पारसबेड़ा, रविदास टोला, मुकंुदबेड़ा और चोराटांड जैसे गांवों में टैंकर के माध्यम से प्रतिदिन करीब एक लाख लीटर पेयजल आपूर्ति कर रही है।
