
जमशेदपुर: शहर की तेलुगु महिलाओं द्वारा चित्रगुप्त भवन, सोनारी में एक भव्य श्रवण उत्सव “श्रवना संददी” का आयोजन किया गया। इस उत्सव में जमशेदपुर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर भाग लेने पहुंचीं।


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गणेश वंदना और ‘ललिता सहस्रनाम’ पाठ
कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना के साथ हुआ, जिसके बाद महिलाओं ने कई तरह की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इसमें सबसे कठिन प्रतियोगिता “ललिता सहस्रनाम” श्लोक वाचन की रही, जिसमें महिलाओं को संस्कृत में 180 श्लोकों का व्याख्यान करना था। महिलाओं ने 10-10 की संख्या में ग्रुप बनाकर इन 180 श्लोकों को तीन भागों में व्याख्यायित किया। इसके अलावा, एक छोटी सी बच्ची के शानदार नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चले इस आयोजन में महिलाओं ने घर के कामकाज से दूर संगीत और नृत्य के साथ भरपूर आनंद लिया।
समाज सेवा और मातृभाषा शिक्षण की पहल
आयोजक जी. विजया लक्ष्मी और के. मनी ने बताया कि तेलुगु समाज का पवित्र श्रावण मास 14 अगस्त से आरंभ हुआ है और समाज की महिलाएं पिछले साल से लगातार इस उत्सव का आयोजन कर रही हैं। उन्होंने बताया कि समाज की महिलाएं विभिन्न संस्थाओं से जुड़कर सामाजिक सेवा के कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
जमशेदपुर में लंबे समय से रह रहे ऐसे लोग जिन्हें अपनी मातृभाषा में पढ़ना-लिखना नहीं आता, उनके लिए कदमा स्थित आंध्र स्कूल परिसर में हर रविवार की शाम को निःशुल्क तेलुगु पढ़ना-लिखना सिखाया जाता है। इसके साथ ही कर्नाटक संगीत की शिक्षा भी दी जाती है, जिसमें आयु या लिंग की कोई सीमा नहीं है। समाज के बाहर के लोगों ने भी तेलुगु सीखने में उत्साह दिखाया है और यह क्लास पिछले तीन वर्षों से सुचारू रूप से चल रही है। ज्ञात हो कि 2026 के लिए तेलुगु वर्ष का नाम ‘पराभव नाम संवत्सरम’ है।
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सामाजिक और परोपकारी कार्य
संस्थाओं से जुड़ी महिलाएं और पुरुष समाज के उत्थान के लिए लगातार कई परोपकारी कार्य कर रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
गरीब महिलाओं के विवाह के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना।
बुजुर्गों और जरूरतमंदों की सहायता करना।
गरीब बच्चों की शिक्षा में आर्थिक मदद करना।
वृद्धाश्रमों में पर्व-त्योहारों के अवसर पर भोजन की व्यवस्था कराना।
हर साल 10 गरीब बच्चों के बीच स्कूल के पाठ्यक्रम की किताबें और कॉपियों का निःशुल्क वितरण करना।
समाज के लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार स्वेच्छा से आगे आकर इन सामाजिक कार्यों में निरंतर सहयोग देते आ रहे हैं।



