
पटना।

बिहार की सबसे बड़ी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी टीचर्स ऑफ बिहार के विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तरह ही कू ऐप भी शिक्षकों में बेहद लोकप्रिय हो रहा है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस स्वदेशी कू ऐप में विगत छः माह में पंद्रह हज़ार से भी अधिक बिहार के सरकारी विद्यालयों के शिक्षक जुड़कर अपने विद्यालयों में हो रहे नवाचारी गतिविधि को साझा कर रहे हैं। कू प्लेटफार्म पर बिहार के शिक्षकों के द्वारा की जाने वाली गतिविधियों एवं सरकारी विद्यालय के बच्चों के वीडियोस को कई सेलिब्रिटी एवं लोकप्रिय व्यक्तियों के द्वारा सराहा जा रहा है। यह जानकारी देते हुए टीचर्स ऑफ बिहार के प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार ने कहा कि कू ऐप का इंटरफ़ेस भी ट्विटर के समान ही है, जिससे उपयोगकर्ता अपने पोस्ट को हैशटैग के साथ वर्गीकृत कर सकते हैं और अन्य उपयोगकर्ताओं को उल्लेख या उत्तरों में टैग कर सकते हैं। कू पीले और सफेद इंटरफेस का उपयोग करता है। 4 मई 2021 को, कू ने “टॉक टू टाइप” नामक एक नया फीचर पेश किया, जो अपने उपयोगकर्ताओं को ऐप के वॉयस असिस्टेंट के साथ एक पोस्ट बनाने की अनुमति देता है। कू एप एक भारतीय कंपनी है। इसे आत्मनिर्भर भारत के तहत बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीयों को एक स्वदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म प्रदान करन है। टीचर्स ऑफ़ बिहार बिहार के सभी शिक्षकों से अपील करती है कि इस प्लेटफार्म पर जुड़ कर स्वदेशी तकनीक को आगे बढ़ाएं और अपने बिहार के सरकारी विद्यालय के शिक्षकों और बच्चों के कार्यों को आगे लाएं।


