
जमशेदपुर।


प्रदर्शन वर्ष 2016-17 के लिए देश में ’बेस्ट परफॉर्मिंग इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट’ के लिए टाटा स्टील लिमिटेड को प्रधानमंत्री ट्रॉफी प्रदान किया गया है। टाटा स्टील को यह सम्मान लगातार चैथा वर्ष मिला है।
1992-93 में इस पुरस्कार की शुरुआत के बाद से ले कर अब तक, टाटा स्टील 11 बार प्रधानमंत्री ट्रॉफी (पीएमटी) और दो बार उत्कृष्टता प्रमाणपत्र जीत चुकी है। इस प्रकार, 13 बार कंपनी को सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र के रूप में मान्यता मिली है।
2016-17 के लिए पीएमटी मूल्यांकन के दौरान, विशिष्ट जजों के एक पैनल द्वारा कंपनी का सख्त मूल्यांकन किया, जिसमें रणनीति, नेतृत्व, सीएसआर, सुरक्षा, वित्तीय समझदारी, स्थायित्व, प्रौद्योगिकी का चुनाव और संचालन की दक्षता जैसे विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया। एक स्वतंत्र एजेंसी (सीआईआई) के नेतृत्व में कंपनी की प्रणालियों और प्रक्रियाओं का भी मूल्यांकन किया गया।
जजों ने स्थायी भविष्य पर नजर रखते हुए एक मजबूत नींव पर मजबूत प्रणालियों के निर्माण की दिशा में टाटा स्टील के प्रयासों सराहना की। लागत, उत्पादन, तकनीकी-अर्थशास्त्र के संदर्भ में वैश्विक स्तर की प्राप्ति, एचआर व आईआर सहित कई मोर्चों पर सर्वोत्तम अभ्यासों का प्रदर्शन आदि कुछ ऐसे क्षेत्र थे, जिन्हें टाटा स्टील के हॉलमार्क के रूप में चिन्हित किया गया। विशिष्ट जजों ने नवाचार, डिजिटलकरण इत्यादि पर भविष्ययोन्मुखी हस्तक्षेपों के माध्यम से एक सतत भविष्य के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और परियोजनाओं पर फोकस की प्रशंसा की।
1992-93 में भारत सरकार द्वारा स्थापित प्रधानमंत्री ट्रॉफी एकीकृत इस्पात संयंत्रों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता देती है। पुरस्कार का उद्देश्य इस्पात संयंत्रों को अपने परिचालन में दक्षता, गुणवत्ता और अर्थव्यवस्था के अंतरराष्ट्रीय मानकों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना है। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य इस्पात संयंत्रों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करना है, ताकि वे लगातार अपने आप को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए तैयार कर सकें और अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकें। एकीकृत इस्पात संयंत्रों के प्रदर्शन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री ट्रॉफी ने वर्ष 2016-17 के दौरान मूल्यांकन के अपने 26 वें वर्ष में प्रवेश किया।
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और भारत सरकार द्वारा किए गए संशोधनों के अनुसार, एकीकृत इस्पात संयंत्रों के प्रदर्शन का एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा मूल्यांकन के मानदंड इस प्रकार हैं: उद्देश्य के पैमाने (इस्पात क्षमता उपयोग, संचालन की क्षमता, वित्तीय प्रदर्शन, उत्पाद की गुणवत्ता, पर्यावरण प्रबंधन, लैंगिक विविधता, सुरक्षा, आर ऐंड डी आदि पर जोर), सक्षमकारी मानकों का मूल्यांकन तथा संयंत्र दौरा और वरीय प्रबंधन के साथ बातचीत के आधार पर जजों के एक पैनल द्वारा अवलोकन।

