
जमशेदपुर,।
टाटा स्टील ने आज प्रमथ नाथ बोस (पी एन बोस) की 161वीं जयंती मनायी। इस अवसर पर टाटा स्टील और व्यापक रूप से भारत में स्टील उद्योग की स्थापना दिशा में उनके बहुमूल्य योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री आनंद सेन, प्रेसिडेंट, टीक्यूएम ऐंड स्टील बिजनेस, टाटा स्टील, विशिष्ट अतिथि श्री आर रवि प्रसाद, प्रेसिडेंट, टाटा वर्कर्स यूनियन और श्री सुधांशु पाठक, वीपी, स्टील मैन्युफैक्चरिंग, टाटा स्टील ने उनकी प्रतिमा को माला पहना कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया।
कार्यक्रम में टाटा स्टील के अन्य वरीय अधिकारी, यूनियन पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।
इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री सेन ने कहा कि यह देख कर अच्छा लगता है कि हमारे लिए वे आज भी प्रासंगिक हैं। मैं यहां पिछले कई वर्षों से आ रहा हूं। प्रत्येक वर्ष हम यहां अपनी सादगीपूर्ण शुरुआत को याद करने के लिए इकट्ठा होते हैं और अपने भविष्य के बारे में सोचते हैं। मेरा मानना है कि स्वर्गीय पी एन बोस के कार्य और आज का यह अवसर हमें जियोलाॅजी के अगली सीमा के बारे मंथन करने के लिए प्रेरित करते हैं। मैं यह भी मानता हूं कि जैसे-जैसे भारत विकास करेगा और अधिक से अधिक खनिजों की आवश्यकता होगी, वैसे-वैसे देश में नये भंडार की त्वरित समझ और खोज की क्षमता गंभीर होती जायेगी।
पी एन बोस के योगदान को याद करते हुए श्री रवि प्रसाद ने जमशेदपुर के आसपास के क्षेत्रों में खनिज भंडारों को चिन्हित करने के उनके प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने रेखांकित किया कि स्वर्गीय बोस के विजन के कारण ही स्टील प्लांट और जमशेदपुर शहर साकार हुआ।


स्वर्गीय बोस के जीवन और उनके योगदान की बेहतर अंतदृष्टि प्रदान करने के लिए इस अवसर पर एक थीमैटिक प्रदर्शनी भी लगायी गयी।
स्वर्गीय पी एन बोस के बारे में:
भूविज्ञानी प्रमथ नाथ बोस यानी पी एन बोस का जन्म 12 मई, 1855 को पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के गायपुर गांव में हुआ था। लंदन यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक बोस ने 1878 में राॅयल स्कूल आॅफ माइंस से कोर्स पूरा किया। भूविज्ञानी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश में धुल्ली और राजहारा में लौह अयस्क खदानों की खोज की। उनकी सर्वाधिक उल्लेखनीय उपलब्धि मयूरभंज में गोरुमहिसानी की पहाड़ियों में लौह अयस्क भंडार की खोज रही। इस खोज के बाद, बोस ने 24 फरवरी, 1904 को जे एन टाटा को एक पत्र लिखा, जिसके फलस्वरूप साकची में टाटा आयरन ऐंड स्टील कंपनी की स्थापना हुई।
स्वर्गीय बोस के नाम कई और उपलब्धियां हैं। उन्होंने कई ऐसे कार्य किये पहले किसी भारतीय ने नहीं किया था। किसी ब्रिटिश यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक करने वाले वे पहले भारतीय थे। असम में सबसे पहले उन्होंने ही पेट्रोलियम की खोज की। पेट्रोविज्ञान में एक सहायक के रूप में उन्होंने सबसे पहले माइक्रो सेक्शंस लागू किये। जियोलाजिकल सर्वे आॅफ इंडिया में एक वर्गीकृत पद पाने वाले पहले भारतीय बने। यहां उन्होंने विशिष्टता के साथ अपनी सेवाएं दी। एक वैज्ञानिक के रूप में उन्होंने देश में तकनीकी शिक्षा को निरंतर आगे बढ़ाने का काम किया। उनके ही प्रयासों के फलस्वरूप बंगाल टेक्नीकल इंस्टीट्यूट की स्थापना हुई, जो आज जाधवपुर यूनिवर्सिटी के नाम से विश्वविख्यात है। स्वर्गीय बोस इस यूनिवर्सिटी के पहले आॅनेररी प्रिंसिपल थे।

