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राज्य सरकार  के न्यायालयों में मुकदमों का बोझ खत्म,थानों में नहीं के बराबर होंगे मामले दर्ज यदि सरकार यह सुझाव मान ले

BJNN DeskBy BJNN DeskDecember 17, 2016No Comments5 Mins Read
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lalan kumar

 

शेखपुरा.ललन कुमार।                                        वास्तव में राम राज फिर से इस धरती पर लाया जा सकता है ।यदि राज्य सरकार शेखपुरा के सदर एसडीओ सुबोध कुमार के सुझावों पर थोड़ा सा भी अमल कर ले ।उन्होंने ने  शेखपुरा संवाददाता  से जो बातचीत के क्रम में सुझाव राज्य सरकार को पेश किया है वाकई क़ाबिल -ए-तारीफ़ है ।उन्होँने लंबे अर्से तक बीडीओ,सीओ,डीसीएलआर, भूमि निबन्धक जैसे विभिन्न पदों पर रहते हुए जमीनी स्तर पर जो चिंतन मनन करने के बाद जनहित और राज्य सरकार के हित में महसूस किया है उन्होंने हमारे संवाददाता से शेयर की है  । उन्होंने कहा कि हमारे समाज में जो भी ज्यादातर अपराध होते हैं उसकी जड़ में भूमि विवाद है ।इस भूमि विवाद के चलते ही हिंसक झड़पें,हत्या,लूट बलात्कार जैसे संगीन अपराधों को भी अंजाम दिया जाता है । ये यदि स्थाई तौर पर खत्म कर दिया जाय तो वास्तव में समाज में जो राम राज की कल्पना है उसको साकार किया जा सकता है ।इस तरह के विवाद को खत्म कर दिया जाय तो  न्यायालयों और थानों में जो मुकदमे का बोझ है स्वतः कम हो जाएंगे ।फिर बहुत ही कम मामले थाने में दर्ज होंगे ।जब थाने में मुकदमा कम होगा तो न्यायालय का बोझा कमेगा ।उनके सुझाव से सरकार को फायदे ही फायदे है और समाज में शान्ति व्यवस्था भी रहेगी ।उनके सुझाव इस प्रकार हैं ———
(1) आवासीय एवं व्यवसायिक भूमि (जिनकी कीमत आज की तिथि में बहुत बढ़ गयी है) को बिक्रेता  को घेराबंदी कराकर ही क्रेता को बेचे जाने का प्रावधान अनिवार्य होना चाहिए ।इससे फायदा यह होगा कि क्रेता का हित सुरक्षित रहेवा।प्रायः ऐसा देखने में आता है कि बिक्रेता ने मंहगी जमीन बेच दी और जब मरता जमीन पर मापी और घेराबंदी करने जाय है तो उनके खरीदगी जमीन के अगल बगल  के चौहदीदार उसे परेशान करते हैं और फिर मामला मापी विवाद का बन जाता हैऔर क्रेता खुद को परेसानी में पड़ा हुआ एवं ठगा हुआ महसूस करता है।नापी विवाद के कारण विधि व्यवस्था की भी समस्या खड़ी होती है। इसलिए  जमीन की घेराबन्दी के बाद खासकर (आवासीय और व्यवसायिक भूमि) बिक्रेता को जमीन बिक्री करने का कानून बनाना चाहिए।इससे क्रेता का हित भी सुरक्षित रहेवा और नापी विवाद बहुत कम हो जाएगा जिससे विधि व्यवस्था की स्थिति भी हदतक अच्छी रहेगा ।
(2).लगान रसीद में जमाबन्दी नं, वर्ष और रकवा का कॉलम तो है लेकिन किसी भी लगान रसीद में खाता,खेसरा और चौहद्दी का कॉलम ही नही है।यह भी मान्य तथ्य है कि खाता,खेसरा और चौहद्दी से ही जमीन की पहचान होती है।इसलिए लगान रसीद में खाता,खेसरा और चौहद्दी का भी कॉलम स्पष्ट रूप से अंकित रहना चाहिए।वर्तमान लगान रसीद को आसानी से संशोधित कर कॉलम जोड़ा जा सकता है ।साथ ही हर खेसरा के लिए अलग अलग रसीद कटनी चाहिए ।इससे बहुत बड़ा फायदा यह होगा कि जमीन की पहचान सरलता से की जा सकेगी और राजस्व अभिलेख आसानी से अद्यतन होता चला जाएगा ।जिससे चालु खतियान बनाने में बहुत आसानी हो जायेगी।साथ ही न्यायालय में रसीद को देखते हुए फैसला देना भी सरल हो जाएगा ।क्योंकि आज की तिथि में एक व्यक्ति के नाम से उसके सभी खेसरों को मिलाकर सम्मिलत रकवा लिख दिया जाता है और रसीद में किसी भी खेसरा का जिक्र ही नही रहता है जिससे जमीन की पहचान नही हो पाती है ।
(3).निबन्धन कार्यालय में जमीन के निबन्धन में अद्यतन लगान रसीद अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए ।इससे फायदा यह होगा की लगान रसीद जिसके नाम से निर्गत होगा वही व्यक्ति जमीन बेच सकेगा ।ऐसा भी देखने को मिलता है कि एक ही जमीन को पिता द्वारा किसी को बेच दिया जाता है और उसी जमीन को उसके बेटे द्वारा किसी और को बेच दिया जाता है ।जिसके बाद खरीददार जमीन पर कब्जा के लिए लड़ाई-झगड़ा करते हैं।विधि व्यवस्था की स्थिति खराब हो जाती है और केस -मुकदमा शुरू हो जाती है।लगान रसीद निबन्धन कार्यालय में अनिवार्य कर देने और उस रसीद पर खाता, खेसरा और चौहद्दी अंकित रहने से इस समस्या पर काफी हदतक लगाम लगाया जा सकता है ।
(4).प्रायः लोग बँटबारानाम में दिलचस्पी नही दिखाते हैं। लोंगो के दो पीढ़ी पूर्व की रसीद कट रही है ।मसलन स्व .दादा के नाम से रसीद कट रही है और लोग उसको अद्यतन नहीं करवा रहे हैं ।साथ ही जमीन खरीद बिक्री चल रही है। यही भूमि विवाद का बहुत बड़ा कारण है  ।राजस्व अभिलेख अद्यतन नही होने का यह भी बहुत बड़ा कारण है । इस संदर्भ में एक बहुत बड़ा सुझाव यह है कि सरकार को रजिस्टर्ड बँटबारेनाम  के लिए लोंगो को प्रेरित करना चाहिए । इस तरह के बँटबारेनामा का निबन्धन शुल्क बहुत कम या निःशुल्क कर देना चाहिए ताकि लोग निबंधित बँटबारा करा सके  ।इससे राजस्व अभिलेख अद्यतन होते चले जायेंगे और कई भूमि विवाद इससे स्वतः समाप्त हो जाएंगे ।

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