लल्लन कुमार
शेखपुरा ।
ऐसा लगता है बिहार सरकार ने अनाज माफियाओं को पीडीएफ और एमडीएम के अनाजों को कालाबाजारी करने की खुली छूट दे रखी है ।तभी तो अनाज माफिया काफी सक्रिय देखे जा रहे हैं और विभागीय अधिकारी इस मामले में आँख मूंदे बैठे हैं ।सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने एमडीएम और पीडीएस के अनाजों को एसएफसी गोदाम से पीडीएस दुकानों और सरकारी स्कूलों तक पहुंचाने के लिए जीपीएस युक्त वाहनों का प्रयोग करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियो को दे रखा है ताकि उन अनाज लदे वाहनों की निगरानी हो सके ,लेकिन इन सरकारी निर्देशों को धता बताते हुए विभाग के पदाधिकारी अनाज माफिया से मिलीभगत कर बिना जीपीएस सिस्टम से लैश वाहनों से अनाजों को भेजते देखे जा रहे हैं । गोदाम से अनाज वाहन को निकलने के बाद माफिया पहले अपने निजी गोदाम में अनाज रखते है ।फिर अनाज के बोरों पलट देते हैं ।पलटे हुए बोरे वाले अनाजों को रात के अंधियारों में या सरकारी अवकाश के दिन ट्रक ,ट्रैक्टर या अन्य वाहनों से अन्य अगल -बगल के गोलदार के दुकानों में या अन्य प्रदेशों में बेच दिए जाते है।बोरे पलटने के बाद खाद्य निगम के बोरों को अनाज माफिया द्वारा या तो जला दिए जाते हैं या दूसरे थैलों में नीचे रखकर ऊपर से अनाज रखकर सील देते हैं । यह सारा खेल उनके द्वारा खेला जाता है जो पीडीएस और एमडीएम के अनाजों को पहुंचाने का ट्रान्सपोर्टिंग लाइसेंस ले रखा है ।प्राप्त जानकारी के अनुसार इस गोरखधंधे में अरियरि प्रखंड के कोई मुखिया पति, शहर के लालबाग मुहल्ले के कोई गल्ला व्यापारी और कोई इलेट्रॉनिक मिडिया के रिपोर्टर शामिल है । दिलचस्प बात तो यह है कि इस गोरखधंधे में अनाज का ट्रांसपोर्टिंग लाइसेंस उक्त रिपोर्टर ने ही अपने निजी रिश्तेदारों के नाम ले रखा है ताकि पदाधिकारियों को आसानी से लाइजनिंग का कार्य कर सके । सूत्रों ने बताया कि गोदाम के आस -पास अनाज खरीदने के लिए दलाल भी मंडराते रहते है ।सुदूरवर्ती इलाकों में अनाज जीपीएस सिस्टम वाले वाहन का इस्तेमाल तो होता ही नहीं । स्थानीय लोकल माफिया के चलते पीडीएस और एमडीएम के अनाजों का हेरा- फेरी चरम पर है ।माफिया द्वारा हर महीने करोड़ों का चुना सरकार को लगाया जा रहा है । वहीँ इस मामले में डीएम दिनेश कुमार ने कहा कि इसकी जानकारी उन्हें नही थी ।मिडिया के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है ।इसकी जांच पड़ताल की जायेगी ।
ललन कुमार




