
गम्हरिया


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आनन्द मार्ग आश्रम, कान्ड्रा में नीलकंठ दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर प्रभात संगीत, बाबा नाम केवलम संकीर्तन, मिलित भोज व नारायण सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें काफी संख्या में आनन्दमार्गियों ने भाग लिया। संकीर्तन के पश्चात् बसंत रामदेव ने आनन्द मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनन्दमूर्ति जी के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए पटना स्थित बांकीपुर केन्द्रीय कार्यशाला में उन्हें दी गई यातनाओं के बावत अनुयायियों को बताया। उन्होंने बताया कि 12 फरवरी 1973 को वे अधर्म पर धर्म की लड़ाई लड़कर विजय प्राप्त किया था। तभी से इस दिन को नीलकंठ दिवस के रुप में मनाया जाता है। इसके आयोजन में आचार्य रंजन ब्रह्मचारी, भरथर हरिजी, बी0 सुदर्शन राव, मुक्ति प्रधान, जगदीश जी, सूर्य प्रकाश, गोपाल कुमार बर्मन आदि का योगदान रहा।

