सहरसा-मुस्लिम प्रश्ननर्ल कानून में दखलदाजी किसी भी सुरत में बर्दास्त नही – मौलाना हाशिम कानपुरी

 

 

सिमरी बख्तियारपुर,सहरसा, ब्रजेश भारती।
सरबैला मदरसा में एक दिवसीय जलसा में उमड़ा जनसैलाब
ईस्लाम दीने फितरत है उपर वाले का पसंदीदा दीन इस्लाम है शरीयते ईस्लाम इलाही है इसमें किसा प्रकार का परिवर्तन या संसोधन प्रलय तक संभव नही है। उक्त बाते शनिवार को अनुमंडल क्षेत्र के बनमा-ईटहरी प्रखंड के दारूल ओलूम गौसिया मदरसा सरबैला में आयोजित एक दिनी जलसा को संबोधित करते हुये मौलाना मो हाशिम कानपुरी ने कहीं। उन्होने उपस्थित लोगो को कहा कि तीन तलाक कुरानी दस्तूर है इसलिये इसमें परिवर्तन संभव नही है। अगर इसमें किसी प्रकार की छेड़खानी का प्रयास किया गया तो भारत के प्रत्येक मुसलमान इसका पुरजोड़ विरोध करेगा और अपनी जान भी इसके विरोध में लगा देगी। उन्होने कहा कि भारत सरकार अगर कोई नया कानून बनाना चाहता है तो सबसे पहले दहेज पर रोक का कानून बनाये तांकि यहा की महिलाओ का कल्याण हो सके क्योकि प्रत्येक दिन हजारों महिला दहेज की बजह से मौत की मुंह में धकेले जा रहे है। उक्त जलसा का सदारत अलहाज सैयद शाह जलालउद्दीन अशरफ ने करते हुये कहा की देश का कोई भी मुसलमान शरीयत कानून में छेड़छाड़ बर्दास्त नही करेगा। राजनेतिक रोटिया सेंकने के लिये यह सब सिगूफा छोड़ा जा रहा है जो गलत है। जलसा का मंच संचालन मौलाना आफाक आलम अशरफी ने किया। जलसा को अन्य वक्ताओ में सैयद साजिद अशरफ,सैयद मदार अशरफ,सैयद अफजल अशरफ,कारी इमामुद्दीन आदि ने संबोधित किया। वही मौलाना इदरीस रजा,मौलाना अफाक आलम,सउद आलम, मौलाना हैदर,मौलाना रिजवान,जावेद अख्तर,नेहाल,जलाल,मौलैना महबूब आलम,मो जाहिद,मो गुड्डो आदि सामिल थे।

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