सहरसा-24 वर्षो से गोदाम में चल रहा अनुमंडल कार्यालय व न्यायालय

BRAJESH

 

ब्रजेश भारती-

सिमरी बख्तिारपुर(सहरसा)

समय बदला तस्वीर बदली,नही बदली तो सिर्फ अनुमंडल क्षेत्र की तकदीर

22 सितंबर 1992 को मिला था अनुमंडल का दर्जा

सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल अपने स्थापना के 24 वां वर्षगांठ 22 सितंबर को मनायेगा। इतने वर्षो में समय बदली,तस्वीर बदली नही कुछ बदली तो अनुमंडल क्षेत्र के विकास की तकदीर। आज भी अनुमंडल कार्यालय सरकारी गोदाम में चल रहा हैं। विकास के नाम पर हवा हवाई दावे,अनुमंडल क्षेत्र में आज भी लगा है समस्याओं का अंबार। सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल प्रत्येक साल दर साल अपना स्थापना दिवस मना रहा। जनप्रतिनिधि बदलते रहे, लेकिन क्षेत्र का चेहरा नहीं बदला। अनुमंडल क्षेत्र के सिमरी बख्तियारपुर,सलखुआ व बनमा ईटहरी प्रखंडों में प्रशासनिक अनियमितता चरम पर है। वहीं क्षेत्र में समस्याओं का अंबार लगा है। इस अनुमंडल को 22 सितंबर 1992 को अनुमंडल का दर्जा मिला था तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने उद्घाटन करते हुये कहा था कि अनुमंडल से संबंधित सभी कार्यालय जल्द ही खोले जायेंगे। लेकिन 24 वर्ष बीतने को है अनुमंडल कार्यालय अभी निमार्ण हाने शुरू हुआ है कार्य की गति देख कर ऐसा लगता है की निमार्ण कार्य पूर्ण होने पर वर्षो लग जायेगे। अभी भी अनुमंडल कार्यालय व न्यायालय गोदाम में चल रहा है। क्षेत्र में जल जमाव प्रमुख समस्या हैं। इस कारण सालों भर हजारों एकड़ जमीन पानी में डूबी रहती है अब तक जल निकासी के लिए सार्थक प्रयास नहीं किया गया है। क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या मुंह बाये खड़ी है क्षेत्र के हजारों लोग दिल्ली, पंजाब, गुजरात, बंगाल, असम सहित देश के कई हिस्सों में रोजगार के लिए हर वर्ष पलायन करते नगर आ रहे हैं। 5 करोड़ की लागत से 100 शैय्या वाला भव्य अनुमंडल अस्पताल तो बनाया गया लेकिन अनुमंडल अस्पताल में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र जैसी भी सुविधा नशीब नही हो पा रही हैं। अगर किसी भी मरीच को प्राथमिक उपचार के बाद सीधे रेफर कर दिया जाता हैं डॉक्टर भी नदारद रहते हैं, बेहतर इलाज के लिए आज भी लोगों को सहरसा, बेगुसराय या पटना जाना पड़ता हैं। पुराने पीएससी भवन में अनुमंडल व्यवहार न्यायालय अपने उद्घाटन का इंतजार कर रहा है। वहीं निबंधन कार्यालय व नगर पंचायत कार्यालय भी अन्य सरकारी भवनों में चलाए जा रहे हैं। अनुमंडल क्षेत्र में एक भी डिग्री कॉलेज नहीं होने से यहां के छात्रों को जिले व अन्य जिलों में जाना पड़ रहा है। क्षेत्र से गुजरने वाले राष्ट्रीय उच्च पथ 107 की दशा किसी से छिपी नही है सड़क ईतनी जर्जर हो चुकी है की पैदल भी चलने लायक नही बची है। सिमरी बख्तियारपुर एवं सलखुआ बाजार में नाला नहीं रहने से पानी का जमाव सड़कों पर ही रहता है। अनुमंडल मुख्यालय सहित क्षेत्र के सभी बाजार अतिक्रमणकारियों की चपेट में हैं। क्षेत्र में शिक्षा एवं विद्यालय की स्थिति भी दयनीय हैं। विद्यालयों में शिक्षकों की कमी रहने के बावजूद अधिकांश शिक्षक अनुपस्थित रहते हैं क्षेत्र के 12 पंचायत में तटबंध के अंदर रहने वाले ग्रामीण आज भी मुश्किल भरी जिन्दगी जी रहे हैं तबियत खराब होने पर खाट ही इनका एम्बुलेंस होता है। नदी पार करने और अस्पताल पहुंचने तक खाट एंबुलेंस पर सवार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। ऐसे में अपने स्थापना के 24 वां वर्षगांठ मना कर यहां के प्रशासनिक,राजनैतिक एवं सामाजिक लोग क्या जनता को दे रही है ये सोचनीय विषय बन गया हैं।

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