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Home » सहरसा-जब सगी माँ बनी सौतन
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सहरसा-जब सगी माँ बनी सौतन

BJNN DeskBy BJNN DeskJune 12, 2016Updated:June 12, 2016No Comments5 Mins Read
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घोड़ कलयुग सास ने दामाद से रचाई शादी 

➡ मामला मधेपुरा जिले के पुरैनी प्रखंड की,सास के पति व बेटी अभी है जीवित।

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महेंद्र प्रसाद, सहरसा✍
पहले दरकाया रिश्ता फिर दी रिश्ते की बलि और एक कलयुगी दामाद ने रिश्ते और मर्यादा की सारी दीवार ना केवल भरभरा कर गिरा डाली बल्कि रिश्ते का सर ही कलम  कर डाला ।पहले तो एक पाक साफ रिश्ते को वर्षों रौंदता रहा फिर ब्याह रचाकर एक काला इतिहास ही बना डाला ।कहते है इश्क और जंग में सब जायज है लेकिन रिश्ते की भी अपनी अहमियत होती है |
➡ क्या है मामला…..फिल्म प्रेम गीत का एक गाना खूब मशहूर हुआ था. होठों से छू लो तुम, मेरे गीत अमर कर दो. बन जाओ मीत मेरे, मेरी प्रीत अमर कर दो. न उम्र की सीमा हो, न जन्मों का हो बंधन, जब प्यार करे, कोई तब देखे केवल मन. नयी रीत चला कर तुम, ये रीत अमर कर दो. पूर्णिया में भी यह चरितार्थ होता दिखा, जब एक 21 वर्ष के शादीशुदा युवक ने अपनी मां समान सास के साथ ही शादी कर ली.यह प्यार का विद्रुप चेहरा है और रिश्ते की गिरती मर्यादा की बानगी है कि मां के समान सास के साथ एक युवक ने अनुमंडल न्यायालय पहुंच कर शपथ पत्र के जरिये बुधवार को शादी रचायी. दामाद की ओर से सास के साथ शादी रचाये जाने की खबर जंगल की आग की तरह फैल गयी और न्यायालय के बाहर इस अनोखे नवदंपती को देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी. हालांकि दोनों पति-पत्नी को अपने अनोखी करतूत का कोई मलाल नहीं था.भीड़ बढ़ती देख दोनों ने जल्दी-जल्दी नोटरी पब्लिक के समक्ष शादी का शपथ पत्र पूरा किया और अपने गंतव्य के लिए प्रस्थान कर गये. शपथ पत्र के जरिये शादी की वैधानिक वैधता कितनी होगी, यह बहस का विषय हो सकता है, लेकिन दामाद ने सास के साथ शादी रचा कर एक अनोखा कीर्तिमान जरूर स्थापित कर लिया है.

➡ दामाद और सास

दो वर्ष पूर्व हुई थी सूरज की शादी….
सास के साथ शादी रचाने वाला युवक मधेपुरा जिला का पुरैनी निवासी सूरज महतो(21 वर्ष) बताया जाता है. उसकी शादी दो वर्ष पूर्व पुरैनी थाना क्षेत्र के मरूआही गांव में हुई थी. सूरज को अपनी पत्नी से एक 1.5 वर्ष का बेटा भी है.

➡घोर कलयुग-

ढाई साल पहले हाथ पकड़कर जिसके साथ अपनी बेटी विदा की थी, अब उसी दामाद के साथ सास ने शादी रचा ली है। पूर्णिया में बुधवार को एक अजीबोगरीब रिश्ते की बुनियाद पड़ी। लाल जोड़े में कोर्ट पहुंची सास ने अपने दामाद के साथ शादी रचा ली। कोर्ट परिसर में उन्हें देखने को भीड़ जमा थी। लोग हतप्रभ थे, लेकिन इस जोड़े को उनकी परवाह नहीं थी।

➡ ढाई साल पहले की थी बेटी की शादी….

ढाई साल पहले ही आशा देवी ने सूरज महतो के साथ बेटी ललिता की शादी की थी। सूरज ललिता को मधेपुरा के पुरैनी गांव स्थित अपने घर ले गया। साल भर बाद सूरज और ललिता को बेटा हुआ। फिर सूरज बीमार पड़ गया। तभी उसके जीवन में सास की इंट्री हुई। सास आई तो थी बीमार का हाल जानने पर प्यार कर बैठी।
वह अपने घर लौटी लेकिन दामाद और उसके बीच पनपा प्रेम परवान चढ़ता गया। दोनों घंटों एक दूसरे से फोन पर बात करते। सूरज का ससुर दिल्ली में किसी फैक्ट्री में काम करता था, इस कारण वह अक्सर आशा से मिलने भी चला जाता था। एक दिन ऐसा आया जब सूरज पत्नी को घर पर छोड़ ससुराल जा बसा। पति को वापस लाने के लिए ललिता ने सारे जतन किए पर वह हार गई। पिता से कहा तो वे दिल्ली से दौड़े आए। समझाया पर बात नहीं बनी।

➡ मंदिर में रचाई शादी…..

एक जून की रात में सास और दामाद ने मधेपुरा के किसी मंदिर में जाकर शादी रचा ली। इसके बाद दोनों धमदाहा थाना क्षेत्र के तरौनी गांव में अपने रिश्तेदार के यहां आ गए। यहां भी लोगों ने खूब समझाया पर बेअसर रहा। बुधवार को दोनों धमदाहा कोर्ट पहुंचे।वकील से शपथ पत्र तैयार कराया और विवाह बंधन में बंध गए। दुल्हन बनी सास ने अपनी बेटी यानी सौतन को भी साथ रखने की इच्छा जताई है। उसका दामाद यानी पति ने इस इच्छा में अपनी सहमति दी है। हैरानी की बात यह है कि सूरज की सास आशा देवी(41 वर्ष) के पति अभी जिंदा हैं. जानकारी अनुसार, किसी परिचित के माध्यम से वे लोग अनुमंडल न्यायालय पहुंचे थे. दोनों निजी वाहन से वहां पहुंचे थे.

➡ बोले दोनों : भगवान से बड़ा कोई नहीं, मंदिर में भगवान को साक्षी मान पहले ही कर ली है शादी

➡ दोनों ने कहा, करते हैं हम प्यार

दामाद सूरज महतो और सास से पत्नी बनी आशा देवी ने पत्रकारों के समक्ष स्वीकार किया कि वे दोनों विगत डेढ़ वर्षों से एक-दूसरे से प्यार करते रहे हैं. सूरज ने माना कि स्थिति ऐसी पैदा हो गयी कि चुप रहने से बेहतर संबंध को उजागर करना ही समझा. इसीलिए वे न्यायालय आकर शादी रचा रहे हैं. वहीं यह भी माना कि उसकी पत्नी को इस बात को लेकर थोड़ी नाराजगी है, लेकिन वह मान जायेगी. दूसरी ओर आशा देवी ने बताया कि उनके पति को दामाद के साथ शादी रचाने पर कोई ऐतराज नहीं है. सूरज को इस बात से भी कोई मतलब नहीं है कि शपथ पत्र के जरिये शादी कितना वैध होता है. दोनों ने कहा कि मंदिर में भी भगवान को साक्षी मान कर वे पहले ही शादी कर चुके हैं, भगवान से बड़ा कोई नहीं होता।

रिपोर्ट- संजय कुमार सुमन मधेपुरा के सोजन्य से।
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