विभाग ने जारी किया दिशा-निर्देश, विद्यालय समिति के सदसय भी ध्यान दे।
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महेंद्र प्रसाद, सहरसा
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प्रारंभिक विद्यालयों में चलने वाली मध्याह्न भोजन योजना में केवल अनाज की हीे हेराफेरी नहीं होती है। अपितु, इसमें कई तरह से चोरी की जाती है। बच्चों की संख्या को घटा-बढ़ाकर तो इसमें खेल किया ही जाता है। एमडीएम के तहत बच्चों को मिलने वाली प्रोटीन व कैलोरी में भी चोरी की जाती है। लेकिन, अब ऐसा नहीं चलेगा। एमडीएम में कैलोरी की चोरी पर रोक लगाने से संबंधित मध्याह्न भोजन निदेशक ने पत्र जारी किया है। जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि मेनू के अनुसार मुख्य घटक प्रोटीन व कैलोरी की मात्रा बच्चों को निर्धारित मात्रा में मिलना आवश्यक है।
अपने अनुसार मध्यान भोजन बनाते है एचएम
निदेशक के पत्र में विद्यालय के प्रधान शिक्षक प्रशिक्षण के दौरान दिखायी गयी वीडियो फिल्म क्षमता संवर्धन के आधार पर ही विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनवाने का निर्देश दिया गया है। ताकि, निर्धारित मात्रा में सभी पोषक तत्व बच्चों को मिल सके। साथ ही विद्यालय के अन्य शिक्षक व रसोइया के साथ ही विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों को भी मध्याह्न भोजन बनाने की उचित विधि की जानकारी प्राप्त हो सके। सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी एमडीएम को जारी पत्र में निदेशक ने कहा है कि राज्य के हर जिले के पांच प्रतिशत विद्यालयों में फूड सैंपल टे¨स्टग कराया जाना है। प्रथम चरण में पटना व जहानाबाद के पांच-पांच विद्यालयों में इसकी जांच करायी गयी। परन्तु, जांचोपरांत परिणाम संतोषप्रद नहीं पाया गया।
प्राइमरी व मिडिल में है अलग-अलग मात्रा तययहां ध्यान देने वाली बात यह है कि प्राइमरी व मिडिल स्कूल के बच्चों के भोजन की मेन्यू में अलग-अलग मात्रा में प्रोटीन और कैलोरी की मात्रा तय है। उसी अनुसार से उनका खाना बनाया जाना है। बताया जाता है कि उसी के हिसाब से बच्चों के खाने का पैसा भी निर्धारित है। लेकिन, यहां जिले के किसी स्कूल में न तो कैलोरी या प्रोटीन की मात्रा का ध्यान दिया जाता है और न ही उस हिसाब से खाना बनता है बल्कि, मेनू को दरकिनार कर हेडमास्टरों के हिसाब से एमडीएम का खाना बनाया जाता है और बच्चों को उसे परोस दिया जाता है।
कितना कारगर सिद्ध होगी नयी व्यवस्था
प्रोटीन और कैलोरी की मात्रा के हिसाब से अगर विद्यालयों में खाना बनाया जाए तो निश्चित बच्चों को पौष्टिक आहार मिलेगा। लेकिन, प्रोटीन और कैलोरी के लिहाज से देखा जाए तो यह तभी संभव है जब प्राइमरी के बच्चों के लिए अगल खाना बने और मिडिल क्लास के बच्चों के लिए अगल। लेकिन, यहां तो वर्ग एक से आठवीं तक के लिए एक ही खाना बनता है और वही खाना सभी बच्चे खाते हैं। अब देखना है क्षमता संवर्धन के अंतर्गत बच्चों को किस तरह से खाना खिलाया जा रहा है और उन्हें किस तरह से उसका लाभ मिलता है।




