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Home » RANCHI NEWS :जब कभी भी आदिवासियों की जमीन छीनने का प्रयास होगा, हर जगह चम्पाई सोरेन खड़ा मिलेगा”
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RANCHI NEWS :जब कभी भी आदिवासियों की जमीन छीनने का प्रयास होगा, हर जगह चम्पाई सोरेन खड़ा मिलेगा”

नगड़ी में किसानों ने रोपनी किया, चम्पाई सोरेन को नजरबंद करने के बावजूद ऐतिहासिक तौर पर सफल रहा आंदोलन
BJNN DeskBy BJNN DeskAugust 24, 2025No Comments3 Mins Read
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रांची। पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन एवं नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर आज कांके प्रखंड के नगड़ी में हजारों की संख्या में आदिवासी – मूलवासी समाज के लोग जुटे, और पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत उन्होंने खेत में हल चलाया तथा रोप्पा रोपा।

इस कार्यक्रम को रोकने के लिए सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी थी। रांची एवं आसपास के सभी जिलों में पुलिस ने अनगिनत स्थानों पर चेकपोस्ट बना कर, आंदोलन के लिए आ रहे लोगों को रोका। सरायकेला खरसावां, पूर्वी सिंहभूम, चाईबासा, गुमला, रामगढ़, हजारीबाग, पतरातु, बुंडू, तमाड़ समेत विभिन्न स्थानों पर चेकपोस्ट बना कर पुलिस ने सैकड़ों गाड़ियों में आ रहे हजारों चम्पाई समर्थकों को रोक दिया।

कल देर रात नगड़ी में आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। कांके क्षेत्र में दर्जनों नये बैरिकेड्स बनाए गए थे एवं छह-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, ताकि वहां परिंदा भी पर ना मार सके। लेकिन आज सुबह जब पूर्व सीएम चम्पाई सोरेन के नजरबंदी (हाउस अरेस्ट) की खबर फैली, तो लोगों में आक्रोश भर गया। उसके बाद हजारों की संख्या में लोग आगे बढ़ने लगे, तो प्रशासन की तैयारियां धरी की धरी रह गईं।

तय कार्यक्रम के तहत दोपहर तक हजारों की संख्या के किसान खेतों में उतरे, और हल चलाना शुरू कर दिया। पुलिस ने पहले लाठी चार्ज, और फिर आंसू गैस के गोले भी चलाए, लेकिन आंदोलनकारी नहीं रुके। उसके बाद किसानों ने अपनी जमीन में बकायदा रोपनी शुरू कर दिया।

देर शाम में चम्पाई सोरेन ने अपने आवास पर एक प्रेस कांफ्रेंस कर राज्य सरकार को आदिवासी विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नगड़ी के किसानों की उपजाऊ जमीन को जबरन छीनना चाहती है। उन्होंने कहा कि अगर 1957 में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के लिए जब यह भूमि अधिगृहित करने की कोशिश की गई थी, तब रैयतों ने उसका तगड़ा विरोध किया था।

उन्होंने बताया कि इस भूमि अधिग्रहण से प्रभावित 153 पंचाटियों में से 128 ने अधिग्रहण का विरोध करते हुए भुगतान लेने से इंकार कर दिया था, तो फिर यह अधिग्रहण पूरा कैसे हुआ? वैसे भी, जब यह अधिग्रहण रिम्स 2 के नाम पर हुआ ही नहीं, तो फिर सरकार सीएनटी एवं भूमि अधिग्रहण अधिनियम का उल्लंघन क्यों कर रही है?

उन्होंने कहा कि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि “विश्वविद्यालय उक्त भूमि को अधिगृहित ही नहीं कर पाई है।” इसी वजह से उस भूमि पर कभी घेराबंदी तक नहीं की गई, लेकिन इस सरकार ने कई दशकों बाद, उसे हथियाने का षडयंत्र रचा है।

पूर्व सीएम ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि “झारखंड में जब कभी भी, कहीं भी आदिवासियों की जमीन छीनने का प्रयास होगा, हर जगह चम्पाई सोरेन उसके खिलाफ खड़ा मिलेगा। हम सरकार को रैयतों की एक इंच भी जमीन जबरन नहीं लेने देंगे।”

पूर्व सीएम ने इस आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता के लिए इस से जुड़े सभी आदिवासी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, किसानों समेत आदिवासी – मूलवासी समाज के लोगों को धन्यवाद दिया।

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