
Anni Amrita

राँची.
झारखंड में लगातार बढ़ते सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों को लेकर नागरिक संगठन ‘लाइफ सेवर्स राँची’ और ‘राइजअप’ ने गहरी चिंता व्यक्त की है. संस्था के सदस्यों ने परिवहन विभाग के सचिव श्री राजीव रंजन (IAS) को एक पत्र सौंपकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और सड़क सुरक्षा नियमों को धरातल पर लागू करने की माँग की है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट ‘रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया 2023’ का हवाला देते हुए पत्र में बताया गया है कि झारखंड पूरे देश में एक्सीडेंट सेवेरिटी (हादसों की गंभीरता) के मामले में तीसरे स्थान पर पहुँच गया है. साल 2023 के आँकड़ों के मुताबिक, देश में सबसे ज़्यादा एक्सीडेंट सेवेरिटी मिजोरम (90.6) में दर्ज की गई, जिसके बाद दूसरे नंबर पर बिहार (80.6) और तीसरे नंबर पर झारखंड (78.5) रहा. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2000 से राज्य में सड़क हादसों की गंभीरता लगातार बढ़ रही है, जो बेहद चिंताजनक है.
सुप्रीम कोर्ट के 5 मुख्य निर्देश जिन पर कार्रवाई की माँग:
पत्र में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिट याचिका (C) संख्या 295/2012 (एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ व अन्य) में दिए गए पाँच मुख्य बिंदुओं पर तुरंत कदम उठाने को कहा गया है:
–फुटपाथ पर चलने वाले पैदल यात्रियों (पेडस्ट्रियन) की सुरक्षा सुनिश्चित करना.
पैदल पार पथ (जेब्रा क्रॉसिंग) को सुरक्षित बनाना.
–दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेलमेट का अनिवार्य उपयोग.
–गलत लेन में गाड़ी चलाने (रॉन्ग-साइड ड्राइविंग) और असुरक्षित ओवरटेकिंग पर लगाम.
–गाड़ियों में चकाचौंध करने वाली सफेद एलईडी (LED) लाइटों, हूटरों और अवैध लाल-नीली बत्ती के दुरुपयोग को रोकना.
अधिकारियों की लापरवाही और नियमों की अनदेखी पर उठाए सवाल
संगठन के सदस्यों ऋषभ आनंद, विशाल एच. शाह, मोहित चोपड़ा, पराग श्रीवास्तव और अतुल गेरा ने पत्र में कहा कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए साल 2017 में ही झारखंड में ‘लीड एजेंसी, रोड सेफ्टी’ का गठन किया गया था. इसके बावजूद ज़मीनी स्तर पर नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है. कई जिलों में ‘जिला सड़क सुरक्षा समितियों’ का गठन और उनका कामकाज अब भी सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के निर्देशों के अनुरूप नहीं है.
इसके अलावा, इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) द्वारा तय किए गए मानकों जैसे— नेशनल हाईवे का अनिवार्य रोड सेफ्टी ऑडिट (IRC SP:50), बेहतर रोड साइन (IRC 67:2022), कंस्ट्रक्शन साइट्स पर सुरक्षा (IRC SP:55) और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) को सुधारने के नियमों की अनदेखी की जा रही है.
ऑनलाइन शिकायत प्रणाली शुरू करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, भूमि स्वामित्व वाली एजेंसियों जैसे पीडब्ल्यूडी (PWD), नगर निकायों और एनएचएआई (NHAI) को फुटपाथों के रख-रखाव, अतिक्रमण हटाने और जेब्रा क्रॉसिंग बनाने के लिए एक ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) शुरू करना होगा. इसमें आम जनता की शिकायतों का एक निश्चित समय सीमा के भीतर निपटारा करना होगा और चित्त न होने पर उच्च अधिकारियों द्वारा समीक्षा (Review) का प्रावधान भी होना चाहिए.
छह महीने के भीतर नियम बनाने की चेतावनी
माननीय अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 138(1A) के तहत गैर-यांत्रिक वाहनों (जैसे साइकिल, रिक्शा) और पैदल यात्रियों के नियमन के लिए तथा धारा 210D के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के अलावा अन्य सड़कों के डिजाइन, निर्माण और रख-रखाव के मानक तय करने के लिए छह महीने के भीतर नियम नोटिफाई किए जाएँ.
नागरिक संगठनों ने परिवहन सचिव से अनुरोध किया है कि झारखंड की खराब रैंकिंग की जांच के लिए लीड एजेंसी को निर्देशित किया जाए और सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को समाचार पत्रों में प्रकाशित कर आम जनता को जागरूक किया जाए.


