
रांची।

झारखंड की राजधानी रांची जल्द ही भारतीय फुटबॉल के सबसे ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित ‘डूरंड कप’ की गवाह बनने जा रही है। इस महाकुंभ को लेकर प्रशासनिक और सैन्य स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी सिलसिले में रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में 23 इन्फैंट्री डिविजन के जीओसी मेजर जनरल सज्जन सिंह मान और डूरंड कप के नोडल ऑफिसर कर्नल हेमचंद्रा ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से शिष्टाचार मुलाकात की। इस अहम बैठक के दौरान राज्य के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार भी मौजूद रहे।
26 जुलाई से रांची में फुटबॉल का महाकुंभ
मुलाकात के दौरान सेना के शीर्ष अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इस वर्ष एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट ‘डूरंड कप’ की मेजबानी रांची को सौंपी गई है। संभावित शेड्यूल के अनुसार, यह ऐतिहासिक टूर्नामेंट आगामी 26 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को टूर्नामेंट के सफल आयोजन के लिए की जा रही प्रशासनिक तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्थाओं और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के साथ स्थापित किए जा रहे आपसी समन्वय की विस्तृत जानकारी दी।
झारखंड के लिए गर्व का विषय: हेमन्त सोरेन
प्रस्ताव और तैयारियों की जानकारी लेने के बाद मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि डूरंड कप केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत का गौरवशाली खेल इतिहास है। इसकी मेजबानी मिलना पूरे झारखंड के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में खेल के क्षेत्र में झारखंड की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है। ऐसे बड़े आयोजनों से हमारे प्रतिभावान खिलाड़ियों को न सिर्फ नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि उन्हें अपना हुनर तराशने का एक बेहतरीन मंच प्राप्त होगा।”
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खिलाड़ियों और दर्शकों की सुविधा पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि डूरंड कप से जुड़ी सभी आवश्यक तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश-विदेश से आने वाले खिलाड़ियों, टीम प्रबंधन और मैच देखने आने वाले हजारों खेल प्रेमियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसका विशेष ख्याल रखा जाए। सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के साथ-साथ ऐसे वैश्विक आयोजनों को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
क्या है डूरंड कप का इतिहास?
गौरतलब है कि डूरंड कप की शुरुआत साल 1888 में हुई थी और यह एशिया का सबसे पुराना तथा दुनिया का तीसरा सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट है। इसका आयोजन भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किया जाता है। रांची में इसके मैचों का आयोजन होना राज्य के स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मील का पत्थर साबित होगा।



