रांची।
झारखंड में जनगणना-2027 को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में जनगणना-2027 के तहत स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री ने खुद ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर राज्य के नागरिकों के सामने एक सकारात्मक और जागरूक उदाहरण पेश किया है। इसके साथ ही उन्होंने समस्त झारखंड वासियों से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय जनगणना प्रक्रिया में अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी समझें और इसमें पूरे उत्साह के साथ सक्रिय भागीदारी निभाएं।
ऑनलाइन पोर्टल और स्व-गणना की प्रक्रिया
कार्यक्रम के दौरान जनगणना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को ऑनलाइन स्व-गणना पोर्टल पर पंजीकरण करने की पूरी प्रक्रिया से विस्तार से अवगत कराया। इस तकनीकी पहल की सराहना करते हुए हेमन्त सोरेन ने कहा कि यह प्रणाली पूरी तरह से पारदर्शी और सुविधाजनक है, जिससे आम लोगों को अपने घर बैठे अपना विवरण दर्ज करने में बहुत फायदा होगा। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्य के सभी जिलों में इस कार्य के लिए प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं ताकि बिना किसी रुकावट के राज्यव्यापी डाटा संग्रह का काम पूरा किया जा सके।
15 मई तक चलेगी स्व-गणना, फिर होगा घर-घर सर्वे
अधिकारियों ने पूरे कार्यक्रम की समय-सारणी की जानकारी देते हुए बताया कि पहले चरण के महाभियान के तहत 1 मई से 15 मई तक स्व-गणना का कार्य शुरू हो चुका है। जो लोग डिजिटल माध्यम से सक्षम हैं, वे खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक पूरे राज्य में मकान सूचीकरण और मकान गणना का कार्य व्यापक स्तर पर चलेगा। इस सघन जनगणना अभियान के दौरान प्रगणक और उनसे जुड़े कर्मी घर-घर जाकर डेटा संग्रह का काम करेंगे, ताकि कोई भी परिवार इस गिनती से छूट न जाए।
भविष्य के विकास और योजनाओं का आधार
हेमन्त सोरेन ने जनगणना के वास्तविक महत्व पर गहराई से प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि यह कार्य सिर्फ आंकड़े जुटाने या सरकारी रजिस्टर भरने तक सीमित नहीं है। बल्कि, यह आम जनमानस के भविष्य को सही और सटीक दिशा देने का एक बेहद मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि सटीक और सही जनगणना से ही राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को और ज्यादा प्रभावी तरीके से जरूरतमंद और पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने में बड़ी मदद मिलेगी। इसी जमीनी डेटा के विश्लेषण के आधार पर भविष्य की नीतियां तय होंगी।
क्षेत्रीय भाषाओं के जानकारों की होगी अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक निर्देश देते हुए कहा कि जनगणना कार्य के दौरान क्षेत्रीय भाषाओं के जानकार पदाधिकारियों और कर्मियों को मुख्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। चूंकि झारखंड विविधताओं और जनजातीय बहुल आबादी वाला राज्य है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में भाषा की कोई बाधा न आए और लोगों से सटीक जानकारी मिल सके, इसके लिए क्षेत्रीय भाषा का ज्ञान बहुत आवश्यक है। उन्होंने एक बार फिर समस्त राज्यवासियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण मौके पर भारत सरकार के जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक प्रभात कुमार, रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, रांची नगर निगम के नगर आयुक्त सुशांत गौरव, सहायक नगर आयुक्त राहुल यादव, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी शेषनाथ बैठा, उप निदेशक केशया आर, सहायक निदेशक मुरारी मोहन, और सांख्यिकी अधिकारी कौशल किशोर सहित कई अन्य पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित थे।




