
रांची।


झारखंड ऊर्जा विकास निगम के अधीन विभिन्न एजेंसियों में काम कर रहे दैनिक वेतन भोगी को कामगारों का 2017 से 2019 तक का एरियर भुगतान अभी तक नहीं हो पाया जबकि इस संबंध में ऊर्जा निगम की ओर से अधिसूचना जारी किए हुए 3 महीने से ऊपर हो गए ।
इस बावत उर्जा निगम की ओर से सभी एरिया बोर्ड/ट्रांसमिशन जोन के महाप्रबंधक सह मुख्य अभियंता को नोटिफिकेशन जारी कर निर्देश दे दिया गया था बावजूद अभी तक किसी एरिया बोर्ड में एरियर का भुगतान नहीं हो पाया वही नए टेंडर निकाल कर कामगारों का भुगतान खाने का जुगाड़ महाप्रबंधक और सर्किल कार्यालय द्वारा किया जा रहा है। उक्त आरोप लगाते हुए
झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि झारखंड ऊर्जा विकास निगम के सभी एरिया बोर्ड/ट्रांसमिशन जोन में विभिन ठेकेदारों के अधीन दैनिक वेतन भोगी मजदूर (कुशल और अकुशल मजदूर) , झारखंड के विभिन्न इलेक्ट्रिक सप्लाई एरिया बोर्ड और ट्रांसमिशन जोन में 2017 से काम करते आ रहे है ,विगत
2017 से अभी तक श्रम विभाग द्वारा तीन-चार बार न्यूनतम मजदूरी दर में संशोधन किया जा चुका है, मगर मजदूरों को बढ़े दर पर भुगतान नहीं किया गया है।
श्रम विभाग द्वारा न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि सम्बन्धी आदेश 2017 में अकुशल मजदूरी का दर 237.44 रुपये था जो अब 299.71 रुपये हो गया, इसी तरह कुशल मजदूरी का दर 327.14 रुपये से बढ़कर 417.31 रुपये हो गया है(श्रम विभाग ने 1 अप्रैल 2019 को आदेश जारी किया है)।
बिना एरियर के भुगतान के विभिन्न एरिया बोर्ड में नया टेंडर निकाल दिया है जिसके तहत रांची में टेंडर नम्बर NIT NO.46/PR/JBVNL/2019-20 गया जिसका विरोध श्रमिक संघ की ओर से किया गया और निगम को चेतावनी दी गई की पहले कर्मियों के एरियर का भुगतान सुनिश्चित कराये जाय उसके बाद नए टेंडर की प्रक्रिया आरम्भ करें।
अजय राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जो इस विभाग के मंत्री भी हैं , उनसे आग्रह करते हुए कहा है कि ऊर्जा निगम के अंदर 2017 से आउटसोर्सिंग व्यवस्था लागू की गई जिसके कारण निगम का लगभग 45 सेे 50 करोड़ रुपए ठेकेदारों को कमीशन के रूप में बांटी गई जिसका फायदा विभाग को दूर-दूर तक नहीं है , बल्कि इस व्यवस्था से पूरे विभाग में काम करने वाले कामगारों के हालात बद से बदतर हो गई हैऔर इनके सामने खाने के लाले पड़े हुए हैं, इसको देखते हुए मुख्यमंत्री हस्तक्षेप करते हुए पूरे आउटसोर्सिंसिंग व्यवस्था की जांच कराएं और पूर्व की व्यवस्था मानव दिवस के रूप में बहाल करें जिसका देखरेख निगम की ओर से होता रहा है ।

