
राजेस तिवारी
पटना |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के अनुसार 11 नवंबर तक सरकारीअस्पतालों, रेलवे टिकट काउंटरों और कब्रिस्तान-श्मशान घाटों आदि पर 500 और 1000 रुपये के नोटों का इस्तेमाल किया जा सकता है। बावजूद इसके, अपनी मां के कफन के लिए 500 रुपये का नोट लेकर मो. इनामुल हक भटकता
रहा।घटना मधेपुरा शहर के वार्ड संख्या 11 की है।बुधवार को इनामुल की मां हंसमुन निशा (60) की मौत हो गई। वह कई दिनों से बीमार चल रही थी। इनामुल कफन खरीदने बाजार गया, लेकिन कोई भी दुकानदार उसे कफन देने को तैयार +नहीं हुआ। उसके पास सिर्फ 500 और 1000 रुपये के ही नोट थे। दुकानदार 100 रुपये के नोट मांग रहे थे।मो. इनामुल ने बताया कि कफन बेचने वाले दुकानदार उसके नोट लेने को तैयार नहीं थे। अन्य दुकानदार भी नोट को खुदरा करने के लिए तैयार नहीं थे। थककर
उसने घटना की जानकारी वार्ड पार्षद को दी। उनकी मदद के बाद ही इनामुल की मां को कफन मिला। उन्होंने छोटे रुपयों का जुगाड़ किया और मृत वृद्धा की अंत्येष्टि हो सकी।
