पटना।
उत्तर बिहार के लोगो को हाजीपुर जाने के लिए गांधी सेतु के जाम से अब मुक्ती मिल गई । क्योकि दीघा पुल पर यात्री ट्रेनो का परिचालन बुधवार से शुरु हो गया । यानि कहा जाए कि उत्तर बिहार के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा। राजधानी से उत्तर बिहार को जोड़ने वाली दीघा पुल पर जब पहली ट्रेन दौड़ी तो लोगों ने हाथ हिलाकर इसका अभिवादन किया। लोग इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बनने पर फूले नहीं समा रहे थे। दीघा पुल पर ट्रेनों का परिचालन शुरू होते ही पटना से हाजीपुर, छपरा, मुजफ्फरपुर, बरौनी, समस्तीपुर, गोरखपुर सहित कई शहरों तक जाने का वैकल्पिक मार्ग भी मिल गया। पहले दिन पाटलिपुत्र गोरखपुर सवारी गाड़ी, पाटलिपुत्र नरकटियागंज इंटरसिटी ट्रेन जैसी सात ट्रेनें दीघा पुल से होकर चलाई गईं जबकि एक ट्रेन पाटलिपुत्र जंक्शन न आने के कारण रद्द रही।
दीघा पुल होकर पहली ट्रेन पाटलिपुत्र बरौनी पैसेंजर सुबह 8.55 बजे पाटलिपुत्र से रवाना हुई। 50 किमी की स्पीड से चलती ट्रेन का यात्रियों ने तालियां बजाकर व जयकारा लगाकर स्वागत किया। लोग इतने उत्साहित थे कि प्लेटफॉर्म पर उतरकर ट्रेन के साथ सेल्फी ले रहे थे। पाटलिपुत्र जंक्शन से पहलेजा तक ट्रैक के दोनों ओर लोग सड़क किनारे, खेतों में व छतों पर से हाथ हिलाकर ट्रेन का स्वागत कर रहे थे।
इधर, पहले स्टॉपेज पहलेजा स्टेशन तक ट्रेन पहुंची ही थी कि ट्रैक पर डेरा जमाए ग्रामीणों ने भरपुरा के पास पटना बरौनी पैसेंजर को रोक दिया। जबकि गोरखपुर-नरकटियागंज- सोनपुर सवारी गाड़ी गोरखपुर से मुजफ्फरपुर होकर हाजीपुर पहुंची और पाटलिपुत्रा जाने के लिए सोनपुर पहुंची लेकिन हंगामे की वजह से सोनपुर से ही टर्मिनेट कर इसे हाजीपुर की ओर लौटा दिया गया। पाटलिपुत्र जंक्शन से इस ट्रेन को गोरखपुर के लिए 11.25 बजे खोला जाना था लेकिन ट्रेन पाटलिपुत्र से रद्द रही।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय, पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, पूर्व मंत्री नंदकिशोर यादव, प्रतिपक्ष के नेता प्रेम कुमार, विधायक संजीव चौरसिया, नितीन नवीन सहित कई लोगों ने पाटलिपुत्र जंक्शन से पहलेजा तक बरौनी जाने वाली डेमू ट्रेन की सवारी की। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से स्टेशन का नाम बदलने के लिए अपनी मांग भी रखी।
पहलेजाघाट स्टेशन का नाम बदलने को भरपुरा में विरोध
पहलेजा घाट स्टेशन का नाम भरपुरा करने को लेकर वहां रेलवे ट्रैक पर ग्रामीण झंडा-बैनर लेकर सुबह से ही जमा थे। इसके पूर्व उन्होंने पहलेजा जंक्शन के नाम पर दूसरा रंग पोत दिया था। पहलेजा स्टेशन से ट्रेन को तीन बार खोला गया, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण वापस स्टेशन पर लाया गया।
आरपीएफ कमांडेंट संतोष कुमार चंद्रन व सोनपुर डीआरएम एमके अग्रवाल के समझाने के बावजूद ग्रामीण मानने को तैयार न थे। उनके सामने ही ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की और भरपुरा के पास रेल का रास्ता चार घंटे तक रोके रखा। रेल प्रशासन व वैशाली जिला प्रशासन के अधिकारियों के काफी मान-मनौव्वल के बाद ग्रामीणों ने रास्ता दिया।
