साकची में विद्यापति स्मृति पर्व समारोह में मैथिली गीतों पर झूमे श्रोता

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जमशेदपुर.24 मार्च
बड़ सुखसार पवल तूअ तीरे, छाड़ई त निकट नयन भर नीरे…, एक अपराध छइ मोरी जानी, परसत पाय माय तू अ पानी…। (अर्थात आपके दर्शन कर इतना आनंद मिला कि मेरे आंख भर आए, पर मैंने एक अपराध कर रहा हूं कि अपने पांव से आपको छू रहा हंू) कवि विद्यापति द्वारा गंगा नदी पर रचित इस कविता को सुनकर साकची आमबागान में आयोजित विद्यापति स्मृति पर्व समारोह में उपस्थित सैकड़ों लोग भाव विह्वल हो उठे। कविता मिथिला रत्न से सम्मानित कुंज बिहारी मिश्र ने पढ़ी। इसमें देश-विदेश से आए कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस दौरान वंदना सिन्हा की गीतों से लोग जमकर झूमे। वंदना बाबुजी के अंगना में उतरइ छई कउआ…, अंगना में आएल बहार मोरा बाजे पायलिया…, सुंदर बलम मिथिला के रोजे घुमबईय टाटा नगरिया… गीत पेश की। कुंज बिहारी मिश्र और रामचरण ठाकुर ने विद्यापति की कविताएं पढ़ी, जिसकी श्रोताओं ने जमकर प्रशंसा की। पंकज झा के निर्देशन में कने एम्हरो नृत्य नाटिका का मंचन किया गया।

मिथिला सांस्कृतिक परिषद, जमशेदपुर द्वारा आयोजित कार्यक्रम के अंतिम दिन कार्यक्रम में अतिथि के रूप में विधायक बन्ना गुप्ता, रघुवर दास, सांसद प्रदीप बलमुचु, उत्पाद आयुक्त जयंत झा, झाविमो के अभय सिंह उपस्थित थे। इसके साथ ही आनंद मेला का भी आयोजन किया गया, जिसमें मिथिला संस्कृति के बारे में लोगों को बताने का प्रयास किया गया। मेला का उद्घाटन उपसमाहर्ता रंजना मिश्रा ने किया। इस अवसर पर डॉ सुधांशु झा और नीलांबर जी उपस्थित थे। इस दौरान लंदन निवासी मैथिली साहित्यकार ज्योति चौधरी को परिषद की ओर से शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

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