मधेपुरा-अखिल विश्व गायत्री परिवार ने दुर्गा गायत्री पूजन,तीन कुंडीय हवन एवम् जप-तप साधना किया आयोजन

संजय कुमार सुमन
मधेपुरा
अखिल विश्व गायत्री परिवार चौसा के द्वारा पंच नारायण काम्पलेक्स एयरटेल टावर चौसा के प्रांगण मे सामुहिक दुर्गा गायत्री पूजन,तीन कुंडीय हवन एवम् जप-तप साधना आज सोमवार को आयोजन किया गया है। जिसमें होम यज्ञ , जप-तप और साधना का अंतिम आहुति दिया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता कुंज बिहारी शास्त्री प्रखंड संयोजक गायत्री परिवार ने की।कार्यक्रम की शुरूआत गायत्री मंत्र और भजन से हुई। मौके पड़ उपस्थित पूर्व जिला संयोजक गोपाल साह ने सम्बोधित करते हुए कहा कि इंद्रियों से अतीत तथा बुद्धि से अगम्य है ! उस तक सीधा पहुँचने का कोई मार्ग नहीं ! नाम-जप , रूप का ध्यान , प्रार्थना , तपस्या , साधना , चिंतन , श्रवण , कीर्तन आदि सभी आध्यात्मिक उपकरण मात्र हैं ! सतोगुणी माया एवं चित्-शक्ति के द्वारा ही जीव और ईश्वर का मिलन हो सकता है !
यह आत्मा और परमात्मा का मिलाप कराने वाली शक्ति गायत्री ही है ! ऋषियों ने इसी की उपासना की है , क्योंकि यह खुला रहस्य है कि शक्ति बिना मुक्ति नहीं ! सरस्वती , लक्ष्मी , काली , माया , प्रकृति , राधा , सीता , सावित्री , पार्वती आदि के रूप में गायत्री की ही पूजा की जाती है ! उन्होने कहा कि पिता से संबंध होने का कारण माता है ! इसलिए पिता से माता का दर्जा ऊँचा है ! ईश्वर की असीम आनंद राशि का आस्वादन करने का सौभाग्य गायत्री माता द्वारा ही मानव प्राणी को प्राप्त होता है !
ब्रह्म की इच्छा , शक्ति एवं क्रिया गायत्री है ! उसी से जगत् की उत्पत्ति , विकास एवं अवसान का आयोजन होता है ! सुंदरता , मधुरता , संपत्ति , कीर्ति , आशा , प्रसन्नता , करुणा , मैत्री आदि के रूप में यह महाशक्ति ही जीवन क्षेत्र को आनंदित एकं तरंगित करती रहती है ! इस विश्वनारी की , महागायत्री की , महामाता की , महाविद्या की आराधना करके हम अधिकाधिक आनंद की ओर अग्रसर हो सकते हैं ! परमानंद प्राप्त करने का यही शाश्वत मार्ग है !
नवआचार्य अभिमन्यु कुमार ने कहा कि साहस ने हमें पुकारा है ! समय ने , युग ने ,कर्तव्य ने , उत्तरदायित्व ने , विवेक ने , पौरुष ने हमें पुकारा है ! यह पुकार अनसुनी न की जा सकेगी ! आत्मनिर्माण के लिए , नवनिर्माण के लिए हम कांटों से भरे रास्तों का स्वागत करेंगे और आगे बढ़ेंगे !
लोग क्या कहते हैं और क्या करते हैं , इसकी चिंता कौन करे ? अपनी आत्मा ही मार्गदर्शन के लिए पर्याप्त है ! लोग अँधेरे में भटकते हैं , भटकते रहें ! हम विवेक के प्रकाश का अवलंबन कर स्वतः आगे बढ़ेंगे ! कौन विरोध करता है , कौन समर्थन , इसकी गणना कौन करे ? अपनी अंतरात्मा , अपना साहस अपने साथ है ! सत्य के लिए , धर्म के लिए , न्याय के लिए हम एकाकी आगे बढ़ेंगे और वही करेंगे जो करना अपने जैसे सजग व्यक्तित्वों के लिए उचित और उपयुक्त है !!
उन्होने कहा कि मनुष्य की क्षमताएं , दोष दुर्गुणों से , कषाय कल्मषों से ,कुकर्म और दुश्चिंतन से दबी रहती है। अध्यात्म का पहला चरण यह है कि इन सब मलिनताओं से जूझें और उन्हें निरस्त कर के रहें। इस प्रक्रिया को ‘तप’ कहते हैं।
अंत में सैकड़ो लोगों ने हवन में भाग लिया और देश और समाज में शांति,आपसी भाईचारा बनी रहे,सबको सद्बुद्धि और सब स्वस्थ हों आदि से हवन किया गया। सभी श्रद्धालु एवं कुमारी कन्याओं को प्रसाद ग्रहण कराया गया।कार्यक्रम के सफल केशव कुमार,डा.दिनेश भगत,देवांशु कुमार देव,प्रतिभा गुप्ता,गीता कुमारीशिवानी कुमारी आदि की भूमिका सराहनीय रही ।

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