
जमशेदपुर/काण्ड्रा। वर्ष में एक दिन ऐसा आता है, जब भक्त मंदिर नहीं जाते, बल्कि यह विश्वास जीवंत हो उठता है कि स्वयं भगवान अपने भक्तों के बीच आने के लिए नगर भ्रमण पर निकल पड़ते हैं。 गुरुवार को काण्ड्रा और पूरे जमशेदपुर क्षेत्र में आयोजित भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक रथ यात्रा ने इसी आध्यात्मिक अनुभूति को साकार कर दिया। श्रद्धा, भक्ति और लोक परंपरा के अद्भुत संगम के बीच महाप्रभु भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर विराजमान होकर मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। इस ऐतिहासिक दृश्य को देखने और प्रभु की एक झलक पाने के लिए सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा।


पाउड़ी स्थान से शुरू हुई महाप्रभु की नगर यात्रा
काण्ड्रा के पाउड़ी स्थान से जैसे ही महाप्रभु का रथ आगे बढ़ा, “जय जगन्नाथ” के गगनभेदी उद्घोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। रथ की मोटी रस्सी को थामने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। मान्यता है कि महाप्रभु के रथ को खींचना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन में सौभाग्य और अक्षय पुण्य प्राप्त करने का सबसे बड़ा अवसर है। यही कारण रहा कि जमशेदपुर और आसपास के इलाकों से आए बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इस आस्था यात्रा का हिस्सा बनने और रथ की रस्सी को स्पर्श करने को उत्सुक दिखे।
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भक्ति और सांस्कृतिक एकता का जीवंत दृश्य
मुख्य बाजार मार्ग से गुजरती रथ यात्रा केवल एक धार्मिक जुलूस नहीं, बल्कि पूरे जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दृश्य बन गई। पूरे मार्ग में भक्ति गीत, संकीर्तन और जयघोष के बीच श्रद्धालु भावविभोर होकर नाचते-गाते रहे। कई स्थानों पर स्थानीय श्रद्धालुओं ने महाप्रभु की भव्य आरती उतारी, छप्पन भोग लगाया और पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। रथ यात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भरा नजर आया।
विशाल भंडारे में हजारों ने ग्रहण किया महाप्रसाद
इस पावन अवसर पर आयोजन समिति द्वारा पाउड़ी स्थान परिसर में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था। इसमें जमशेदपुर और काण्ड्रा के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ खिचड़ी महाप्रसाद ग्रहण किया। सेवा में जुटे स्वयंसेवकों ने भीषण गर्मी और भीड़ के बावजूद पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था बनाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे यात्रा बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हुई।
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एक सूत्र में बंधा समाज और अटूट परंपरा
स्थानीय प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि जमशेदपुर-काण्ड्रा क्षेत्र की यह रथ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का एक अनूठा उत्सव है। यह भव्य आयोजन हर वर्ष लोगों को जाति, भाषा और सामाजिक सीमाओं से ऊपर उठकर एक ही रस्सी से जोड़ देता है। यह वह पवित्र रस्सी है, जिससे न केवल महाप्रभु का दिव्य रथ खिंचता है, बल्कि समाज की आपसी एकता, भाईचारा और अटूट आस्था भी आगे बढ़ती है।


