जमशेदपुर-एक कब्रिस्तान ऐसा, जहां कुत्तों को दी जाती है समाधी

रवि झा

अब तक 34 कुत्तों को दी गयी है समाधी

जमशेदपुर।

अभी तक लोगों ने कुत्तों के लिए मसाज पार्लर या स्वीमिंग पुल के बारे में सुना होगा. कुत्तों के शौकीनों के लिए कई प्रकार के अत्याधुनिक तकनीकें बाजार में उपलब्ध हैं। जिसका प्रयोग लोग अपने प्यारे कुत्तों के लिए करते हैं। बावजूद इसके आमतौर पर इंसान अपने प्यारे कुत्ते को मरने के बाद या तो सड़कों से सटे कचरों के ढ़ेर पर फेंक जाते हैं या नदियों-तालाबों में फेंक देते हैं। जिससे पर्यावरण तो प्रदूषित होता ही है साथ ही मृत कुत्ते की आत्मा को भी ठेस पहुंचती है। लेकिन जमशेदपुर के टेल्को स्थित डॉग केनॉल देश की एक मात्र ऐसी जगह है। जहां कुत्तों को मौत के बाद उन्हें फेंका नही जाता, बल्कि उसकी वाफादारी को याद रखने के उद्देश्य से उसकी समाधी बनायी जाती है। जहां हर समाधी पर कुत्तों की वफादारी के कारनामे दर्ज किए जाते हैं.।

टाटा मोर्टस के केनॉल क्लब मे है समाधी

टाटा मोटर्स जो देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी है, जहां भारी वाहनों से लेकर मंझोले वाहनों का निर्माण किया जाता है.। उसी कंपनी की सुरक्षा की जिम्मेवारी सुरक्षा गार्डों के अलावा इन कुत्तों पर भी रहती है। कुत्ते कंपनी की सुरक्षा के लिए दिन- रात लगे रहते हैं.। कंपनी प्रबंधन भी कुत्तों की देखभाल में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता है। इतना ही नहीं, जो कुत्ते सेवा देते-देते मर जाते हैं। टेल्को केनॉल परिसर में उसे समाधी दे दी जाती है. फिलहाल इस अनोखे कब्रिस्तान में 34 कुत्तों की समाधियां हैं। साथ ही सभी समाधियों पर मृत कुत्तों के कारनामों को भी दर्ज किया गया है।

क्या कहते है टाटा मोर्टस के अधिकारी

इस अनोखे कब्रिस्तान के संबंध में टाटा मोटर्स के सिक्यूरिटी हेड स्क्वार्डन लीडर नसीब सिंह कादियन न ने बताया कि यहां पर कुत्तों को बचपन से पाल – पोश कर प्रशिक्षण भी दिया जाता है। फिलहाल यहां 13 कुत्ते है। हालांकि इसमें से एक कुत्ता के रिटार्यड होने के कारण उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। इन कुत्तों  द्वारा शहर के अलाव देश मे अन्य जगहो पर होने वाले  कई डॉग शो मे भाग लेकर सैकड़ों ईनाम भी जीत चुके  हैं। इतना ही नहीं सारे कुत्ते टाटा मोर्टस के लिए सुरक्षा के लिए काम तो करते ही हैं और  समय – समय पर जिला प्रशासन इन कुत्तों की मदद भी लेता है।

इस केनाल क्लब के केयर-टेकर संजय कुमार का कहना है कि कुत्तों की वफादारी के किस्से तो कई हैं लेकिन, कुत्तों के मरने के बाद इस प्रकार की इज्जत दिया जाना पूरे देश के लिए गौरव की बात है।

 

 

. सभी कुत्तों की समाधी पर टी लिखा गया है

इस रोचक पहलू की जानकारी देते हुए टाटा मोटर्स के सिक्यूरिटी हेड ने बताया कि जब इस केनाल क्लब में कुत्तों को लाया  जाता है तो उसका नामकरण टी शब्द से किया जाता है। चूंकि ये कुत्ते टाटा ग्रुप के लिए काम करते हैं। इसलिए मरने के बाद टाटा ग्रुप इन कुत्तों के सम्मान में इन्हें अपना प्रतीक देते हैं। सिक्यूरिटी हेड ने बताया कि वर्तमान समय में जितने भी कुत्ते इस केनाल क्लब में हैं, उन सभी कुत्तों का नाम टी से है।

1965 में दी गयी थी पहले कुत्ते को समाधी

इस अनोखे केनाल में पहली बार 22 नवंबर 1962 को जन्मे राणा बॉन एक्रव नामक कुत्ते को 31 मार्च 1965 में समाधी दी गयी थी। जबकि अंतिम कुत्ते के रूप में टोजो नाम के कुत्ते को 13 जून 2013 को समाधी दी गयी.।

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