
जमशेदपुर।
वीमेंस कॉलेज में शुक्रवार को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ तथा प्रबंधन संकाय के संयोजन में ‘ब्लूम्स टेक्सानाॅमी एण्ड ऑनलाइन रिसोर्सेज’ विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न हुआ। वेबिनार की मुख्य आयोजक सह प्राचार्या प्रो. (डॉ.) शुक्ला महांती ने आरंभिक संबोधन में बताया कि आज पठन-पाठन के सभी तरीके पुराने पड़ गए हैं। प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव और ग्लोबल समय ने नये टूल्स विकसित किए हैं। इनकी पहुँच और प्रभाव काफी तीव्र और गहरे हैं। लिहाजा जरूरी है कि हम शिक्षक किसी भी स्थिति में नये बदलावों से सबसे पहले परिचित हों और उनका उपयोग करके प्रभावी और परिणामदायी शिक्षण के अग्रदूत बनें। उन्होंने रिसोर्स पर्सन के रूप में गूगल मीट ऐप्लीकेशन के मार्फत जुड़े एक्सएलआरआई के प्रोफेसर (डॉ.) आशीष कुमार पाणि का स्वागत किया और कहा कि उनके संबोधन से फैकल्टी मेंबर और छात्राएँ सभी लाभान्वित होंगे।


*शिक्षक ही सबसे मुखर और सतत लर्नर होता है- प्रो. आशीष कुमार पाणि*
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वेबिनार के केन्द्रीय विषय पर चर्चा करते हुए प्रोफेसर आशीष कुमार पाणि ने कहा कि शिक्षक ही सर्वाधिक मुखर और लर्नर होता है। यदि वह नए बदलाव के प्रति, सीखने के नए तरीकों के प्रति अद्यतन नहीं है, तो अपने विद्यार्थियों को भी प्रभावी ढंग से शिक्षित नहीं कर सकता। उन्होंने ब्लूम्स टैक्सनॉमी की अवधारणा और उसके प्रकार्य पर बात करते हुए कहा कि यह सिद्धांत 1950 में ब्लूम्स के द्वारा प्रतिपादित किया गया था। यह सिद्धांत पढ़ने और पढ़ाने के संश्लिष्ट और विशिष्ट उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक वैज्ञानिक पद्धति के रूप में काम करता है। उन्होंने कहा कि इस सिद्धांत के 6 चरण होते हैं। क्रिएटिंग, इवेलुएटिंग, एनालाइजिंग, अप्लाईंग, अंडरस्टैंडिंग और रिमेंबरिंग। जिनका उपयोग करते हुए हम सीखने के छह उद्देश्यों को कम्युनिकेशन स्किल, ग्लोबल माइंड सेट, सस्टेनेबिलिटी, फंक्शनल नॉलेज, डिसीजन मेकिंग और क्वेस्ट फॉर एक्सीलेंस को हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ब्लूम टैक्सनॉमी ने अमेरिका सहित दुनिया भर में पठन-पाठन के तौर-तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। एक्सएलआरआई में भी इस सिद्धांत को प्रयोग में लाते हैं। यदि इसकी अवधारणा को ठीक से समझ लिया जाए तो परंपरागत पाठ्यक्रम में भी गुणात्मक परिणाम देखे जा सकते हैं। इस दौरान दौरान पूछे गए प्रश्नों का जवाब भी रिसोर्स पर्सन ने दिया। कार्यक्रम का संचालन व धन्यवाद ज्ञापन विभाग की तरफ से समन्वयक गायत्री कुमारी गुप्ता ने किया। इस वेबिनार में कॉलेज के शिक्षक- शिक्षिकाओं व छात्राओं सहित देश भर से ढाई सौ प्रतिभागी सीधे जुड़े रहे और लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से 680 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। तकनीकी समन्वयन का कार्य बी. विश्वनाथ राव और ज्योतिप्रकाश महांती ने किया।

