जमशेदपुर लोकसभा सीट ,भाजपाा और आजसू के बीच कोई बड़ा समझौता —झाविमो,

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वरीय संवाददाता,जमशेदपुर,24 मार्च
जमशेदपुर लोकसभा सीट से आजसू पार्टी द्वारा प्रत्याशी नहीं दिये जाने पर झाविमो नेताओं ने भाजपाा और आजसू के बीच कोई बड़ा समझौता (राजनीतिक लाभ या फिर पैसे का लेन-देन) होने का आरोप लगाया है। इसकी जांच के लिए मुख्य चुनाव आयोग के पास झाविमो द्वारा पत्र भी लिखा जायेगा।
झाविमो के वरिष्ठ नेता पूर्व विधयक सनातन मांझी, नरेश मुर्मू, खागेन महतो, ललन चैहान और शशिभूषण ने सोमवार को काशीडीह स्थित पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा और आजसू पर आदिवासी-गैर आदिवासी और महतो व मांझी को आपस में लड़वाने तथा जाति के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।
झाविमो नेताओं ने कहा कि समय बदल गया है, मतदाता जागरूक हैं, जनता में राजनीति सोच बढ़ी है अब जातिवाद की राजनीति नहीं चलेगी। जनता अपना मत देकर ऐसे नेताओं को सबक सिखायेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एक परिवार में अगर 10 सदस्य मतदाता हैं तो जरूरी नहीं कि सबका वोट एक ही पार्टी को या फिर एक ही प्रत्याशी को मिल जाये। इसलिए झामुमो को छोड़कर भाजपा में आने वाले विद्युतवरण महतो की हार और झाविमो प्रत्याशी डा. अजय कुमार की जीत तय है।
झाविमो नेताओं ने आगे कहा कि झारखण्ड विकास मोर्चा सुदेश महतो से ये जानना चाहती है कि उनका और भाजपा के साथ क्या डील हुई है? कि वो जमशेदपुर लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी नहीं उतारना चाह रही है। उनके इस तरह के रवैये से ऐसा प्रतित होता है कि उन्होनें जनमानस की भावनाओं से किनारा करते हुए एक बार अपनी अवसरवादी छवि को प्रदर्शित किया है। उनकी पार्टी आजसु से क्षेत्र की जनता यह जानना चाहती है कि भारतीय जनता पार्टी से किन विषयों को लेकर कितने करोड़ की डील सम्पन्न हुई है।
आजसु पार्टी का यह हमेशा से चरित्र रहा है किसी न किसी रूप में राज्य सरकार हिस्सा बनकर रहना ताकि वो अपनी हर तरह की महत्वाकांक्षा चाहे वह राजनीतिक हो अथवा आर्थिक वह पूरी हो सके। उनके इस अवसरवादी क्रियाकलाप से यहां की जनता स्तब्ध है और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के जिस प्रत्याशी के समर्थन में अपना प्रत्याशी नहीं दिया वह प्रत्याशी बहरागोड़ा के विधायक विद्युतवरण महतो जिन्होंने अपने पूरे राजनीतिक कार्यकाल में जीतने के पश्चात बहरागगोड़ा के लोगों की कभी सुध लेने नहीं गये।
विद्यतवरण तो ऐसे नेता हैं जो चंद पैसों के लिए जिस थाली में तीन दशकों तक खाये उसी थाली में छेद किया। हार्स ट्रेडिंग जैसे संगीन जुर्म के आरोपी विद्युतवरण महतो को अर्जुन मुंडा के द्वारा प्रत्याशी बनाया जाना और अचानक सुदेश महतो द्वारा उसे समर्थन देना ऐसा प्रतीत होता है कि इस हार्स ट्रेडिंग जैसे गंभीर अरोपों में इन तीनों की संलीप्तता स्पष्ट रूप से दिखायी पड़ती है, जो अपने पाक साफ बताने बाली भाजपा की चरित्र की कलई को खोलता है। झारखण्ड में जोड़-तोड़ की राजनीति करने में अर्जुन मुण्डा को महारत हासिल है।
इसी चरित्र के वजह से उन्होंने आज करोड़ों-अरबों की बेनामी संपत्ती बनायी है। इस लोकसभा चुनाव में अर्जुन मुण्डा द्वारा वोटरों को लुभाने और भाजपा के पक्ष में मतदान करने में तरह-तरह के हथकंडे अपनाये जा रहे है। यदि ऐसेे राजनेता अर्जुन मुण्डा को अर्जुन गुण्डा कहा जाए तो कोई गुनाह नहीं होगा। अर्जुन मुण्डा हमेशा दूसरे के घरों को तोड़कर अपनी अपने नीव डालने एवं आपस में फुट डालने का काम करते आ रहे है।

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