
जमशेदपुर : 3जुलाई 2020
जमशेदपुर उसके आसपास के इलाकों से लगभग 5,000 से भी ज्यादा आनंद मार्गी प्रथम संभागीय सेमिनार अपने घर पर बैठकर लैपटॉप मोबाइल एवं अन्य तरह के अत्याधुनिक साधनों से सेमिनार का लाभ उठाया साधकों के जीवन रक्षा को ध्यान में रखते हुए साधकों के मानसाध्यात्मिक प्रगति को ध्यान में रखते हुए लाइव वेबकास्टिंग से तीन दिवसीय प्रथम संभागीय सेमिनार का आयोजन किया आज 3 जुलाई सेमिनार के प्रथम दिन हिंदी में में आनंद मार्ग प्रचारक संघ के सेमिनार के ट्रेनर आचार्य रुद्रानंद अवधूत , ऑनलाइन ( *live webcasting) लाइव वेबकास्टिंग से साधकों को संबोधित करते हुए विषय
माइक्रोवाइटमः(अणुजीवत्) अणुदेह और भूमादेह प्रकाश डालते हुए कहे कि कोरोना वायरस (स्थूल नेगेटिव माइक्रोवाइटम) ने पृथ्वी ग्रह पर एक बड़ी आपदा पैदा की है। महामारी की इस अवस्था में, इस असहाय स्थिति में भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने जो मार्गदर्शन किया वह निम्नलिखित है। कोरोना वाइरस एक ऋणत्मक (नेगेटिव) माइक्रोवाइटा है जिसका वर्तमान में कोई दवा नहीं बन पाई है डॉक्टर प्रयास में है। । इस बीमारी से लड़ने के लिए पॉजिटिव (धनात्मक) माइक्रोवाइटा एकमात्र उपाय है। प्रत्येक स्तरों पर पॉजिटिव माइक्रोवाइटा निर्मित करने के उपाय निम्नलिखित है: –

शारीरिक और मानसिक स्तर पर स्वच्छता ही बचाव का श्रेष्ठकर उपाय है।
दैहिक स्तर पर:- मूत्र त्याग के बाद जल का प्रयोग।जननेंद्रिय के अग्रभाग के चमड़ा को खोल कर रखना।
संधि स्थल के बाल को नहीं काटना और नित्य प्रति साबुन से धोकर तेल लगाना और कंघी करना। पुरुषों के लिए लंगोटा पहनना आवश्यक है एवं महिलाएं कसी हुई जांघिया पहनेंगी।
आसन, ध्यान, भोजन एवं शयन से पूर्व व्यापक शौच क्रिया अवश्य करेंगे। व्यापक शौच क्रिया की विधि सबसे पहले जनेन्द्रिय को धो लेंगे, तदुपरांत घुटने से नीचे के हिस्सा को धो लेंगे, केहुनी से नीचे हाथ को धो लेंगे, तदोपरांत मुंह में पानी भर कर आंख पर 12 बार छींटे लगाएंगे, फिर नाक से पानी खींच कर मुंह से निकाल देंगे, अंत में कान और कंधे को धो लेंगे।
नित्य प्रति स्नान करेंगे और अंडर गारमेंट को धोएंगे।
सात्विक भोजन करेंगे।
एकादशी अमावस्या और पूर्णिमा के दिन निर्जला उपवास करेंगे।
मानसाध्यात्मिक स्तर पर:-
नियमित ईश्वर प्रणिधान और अष्टांग योग के सभी अंगों का पालन करेंगे।
इष्ट , आदर्श, आचरण विधि एवं चरम निर्देश के साथ कभी भी समझौता नहीं करेंगे।
शपथ का स्मरण और अनुसरण करेंगे। नियमित सप्ताहिक धर्म चक्र में भाग लेंगे।
आचरण विधि, सेमिनार , कर्तव्य एवं कीर्तन नियमित करेंगे।
*गर्म पानी से गरारा करे। गर्म पानी ही पिये।
गरम भोजन का सेवन करें ।*
मांस-मदिरा प्राण घातक है।
आध्यात्मिक स्तर पर:- “बाबा नाम केवलम्” अष्टाक्षरी सिद्ध महामंत्र कीर्तन गाकर, सर्व मंगलाकांक्षी का भाव लेकर, आध्यात्मिक वातावरण द्वारा सकारात्मक स्पंदन की सृष्टि कर पॉजिटिव माइक्रोवाइटा कोरोना वायरस को प्रतिहत करने में सहायक सिद्ध होगा।
आत्मविश्वास का मजबूत होना आवश्यक है जो सिर्फ साधना सेवा और त्याग से ही मिलता है।

