
ऩई दिल्ली।


रेल यात्रा रियायत की वर्तमान नीति के अनुसार 60 वर्ष और उसके ऊपर की आयु के वरिष्ठ पुरूष नागरिकों और 58 वर्ष और उसके ऊपर के आयु की वरिष्ठ् महिला नागरिकों के लिए मेल/एक्सप्रेस/राजस्थानी/शताब्दी आदि रेल गाडि़यों की सभी श्रेणियों में क्रमशः 40 प्रतिशत और 50 प्रतिशत रियायत दी जाती है। इससे जल्दी ही वरिष्ठ नागरिको को उपलब्धता के आधार पर लोवर बर्थ आवंटित करने का भी प्रावधान नियम में है। टिकट खरीदते समय आयु के प्रमाण की आवश्यष्कता नहीं है, हालांकि यात्रा के दौरान वरिष्ठ नागरिकों को सरकारी एजेंसी द्वारा जारी किए गए निर्धारित कागजात सबूत के रूप में अपने पास रखना जरूरी है, जिनमें उनकी आयु या जन्म तिथि के बारे में जानकारी हो। यात्रा के दौरान अगर वरिष्ठ नागरिक आयु से संबंधित आवश्यक दस्तावेज नहीं दे पाता है तो उससे किराए में अंतर (पूरे किराए और रियायती किराए के बीच का अंतर) का शुल्क लिया जाता है।ऐसा देखा गया है कि उपरोक्त नियम के अनुसार कई बार कुछ यात्री अपनी वास्तविक उम्र छिपाकर वरिष्ठ नागरिको के कोटे से रेल टिकट बुक करते है तथा नियमानूसार लोवर बर्थ भी प्राप्त कर लेते है। यात्रा के दौरान यदि पकड़े गए तभी अन्तर की राशि जमा करते है अन्यथा यात्रा करते है। इससे रेलवे राजस्व की हानि होती है। इसके साथ ही साथ कुछ टिकट एजेंट भी ई-टिकट में वरिष्ठ नागरिको के कोटे के नाम पर गलत जानकारी देकर टिकट बुक करते है एवं बाद में उसे संशोधित करवा लेते है।वरिष्ठ नागरिको के कोटे पर इस प्रकार के दूरुपयोग को रोकने एवं वास्तविक यात्रियों को इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ दिलाने के उद्वेश्य से रेलवे प्रशासन के द्वारा इस नियम में दिनांक 01 फरवरी, 2016 से बदलाव किये जा रहे है। इस बदलाव के तहत वरिष्ठ नागरिक ‘आरक्षण’ और वरिष्ठ नागरिक ‘रियायत’ का दुरुपयोग करने वाले यात्रियों को बगैर टिकट यात्री माना जाएगा और उसी के अनुसार पेनल्टी के रूप में शुल्क लिया जाएगा। इस कदम से वास्तविक रूप में वरिष्ठ नागरिक यात्रियों को मदद मिलेगी। यह नियम दिनांक 01 फरवरी, 2016 स लागू होगें।

