जमशेदपुर। हमारे धार्मिक ग्रन्थ ज्ञान को जीवन में समायोजित करते हैं और उनमें श्रेष्ठ हैं, श्री रामचरित मानस, जिसे जीवन के अनुशासन का ग्रन्थ कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, उक्त विचार आज यहां चिन्मय विद्यालय, साउथ पार्क, बिष्टुपुर परिसर में कक्षा-1 से कक्षा-8 तक बच्चों के लिए आयोजित दो दिवसीय श्री रामचरित मानस पाठ प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए विद्यालय की प्रिन्सिपल श्रीमती मिक्की सिंह ने व्यक्त किया। इससे पूर्व उन्होने मर्यादा पुरुषोत्तम राम एवं स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के तस्वीर के सम्मुख दीप प्रज्जवलित किया, उनके साथ विद्यालय की वरीय शिक्षिका श्रीमती रुमा गुप्ता, श्रीमती विनिता मिश्रा एवं श्रीमती मिताली, संगीत शिक्षक श्री टी. ईश्वर राव तथा जन्मदिन वाली बच्ची (बर्थडे गर्ल) ईशा हल्दिया ने दीप प्रज्जवलित किया। श्रीमती सिंह ने कहा कि अनुशासनहीन जीवन असफलता और निराशा लेकर आता है, ऐसे में बच्चों में शिक्षा के साथ साथ ऐसे प्रेरक व मार्गदर्शक गन्थों की शिक्षा महत्वरपूर्ण हो जाती है जो जीवन को अनुशासन की ओर ले जाता है और चिन्मय मिशन का यह प्रमुख लक्ष्य भी है। आज यहां कक्षा 1 से कक्षा -5 के 60 बच्चों ने श्रीरामचरित मानस के उत्तरकांड भाग में भगवान श्रीराम की महिमा का कंठस्थ पाठ किया। निर्णायक और प्रेरक की भूमिका में वरीय शिक्षिका श्रीमती रूमा गुप्ता, श्रीमती विनिता मिश्रा एवं श्रीमती मिताली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। स्कूल के संगीत शिक्षक टी. ईश्वर राव ने इस पूरे कार्यक्रम का संचालन किया तथा अपने मेहनत से बच्चों को संगीतपूर्ण श्रीरामचरित मानस गायन हेतु तैयार किया। श्री राव ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि कच्चे मिट्टी से आप जितने खूबसूरत खिलौने बना सकते हैं, उसी प्रकार बाल मानस में आप अपने सारपूर्ण, शिक्षा प्रद ग्रन्थों को समायोजित कर उनके भविष्य को सुसंस्कृत व मजबूत बना सकते हैं।




