उपायुक्त कार्यालय के समीप किया सड़क जाम, आश्वासन के बाद हटाया जाम
जमशेदपुर।
बुधवार को बाल सुधार गृह में हुए एक बाल कैदी की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस से लेकर जिला मुख्यालय तक बस्तीवासियों एवं परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया. गुरूवार को सौ से भी अधिक की संख्य में महिलाएं, पुरूष व बच्चों ने जिला मुख्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने उपायुक्त कार्यालय के समीप से गुजरनेवाली मुख्य सड़क को घंटों जाम कर दिया. बाद में स्थानीय पुलिस प्रशासन के द्वारा निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया गया जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपते हुए अविलंब दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की. इससे पहले धातकीडीह से मुखी समाज के लोग गोलबंद होकर रैली की शक्ल में जिला मुख्यालय पहुंचे एवं देखते ही देखते बीच सड़कों पर प्रदर्शन करने लगे. देखते ही देखते पूरा सड़क जाम कर दिया. जिसके बाद स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची एवं प्रदर्शन कर रहे बस्तीवासियों को काफी समझाने का प्रयास किया लेकिन बस्तीवासी अपनी जिद पर अड़े रहे. काफी देर के बाद डीएसपी स्तर के पदाधिकारी से वार्ता के बाद प्रदर्शनकारियों ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद अपना प्रदर्शन वापस ले लिया.
सोनू के नाम पर राजनीति क्यों
बड़ा प्रश्न ये है कि जिस सोनू राम (बाल कैदी) के लिए आज पूरा मुखी समाज एक जुटता दिखा रही है, उसी सोनू के लिए मुखी समाज क्यों कोई एसी व्यवस्था नहीं बना सकी कि वो मासूम गुणाह के दलदल में पहुंच गया. जिस वक्त मासूम अपने परिजनों से बाल सुधार गृह से बाहर निकालने की फरियाद कर रहा था उस वक्त कोई समाज का रहनुमा क्यों नहीं उसके परिजनों की मदद करने पहुंचा. आखिर परिजन बार- बार यही कहते सुने जा रहे थे कि जमानत के लिए पैसों की समय पर व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण उसे जमानत नहीं करा पा रहे थे. बताया जाता है कि सोनू शारीरित पीड़ा से भी ग्रसित था. ऐसे में समाज का कोई प्रभावशाली व्यक्ति क्यों उसकी मदद करने नहीं पहुंचा. प्रशासन की लापरवाही से हम इंकार नहीं करते लेकिन चूंकि जिले के उपायुक्त ने बुधवार को ही मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पदाधिकारी को हटा दिया एवं मामले की जांच करने को लेकर टीम का गठन करने का आदेश भी दे दिया, तो फिर चंद मुट्ठी भर सोनू के चाहनेवाले आखिर सोनू के लिए कैसा इंसाफ चाह रहे थे. क्या सोनू के नाम पर राजनीति करने से सोनू को इंसाफ मिल जाएगा. जबकि जिला के उपायुक्त की ओर से त्वरित कार्रवाई करते हुए इस दिशा में आवश्यक दिशा निर्देश पूर्व में ही जारी कर दिया गया. रही बात मुआवजे की तो जांच के क्रम में यदि साबित हो जाती है कि सोनू की मौत जेल प्रबंधन की लापरवाही से हुई है तो उसके परिजनों को निश्चित तौर पर मुआवजा भी मिलेगा एवं दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है.




