जमशेदपुर।
जिला के मुसाबनी प्रखण्ड के उग्रवाद प्रभावित इलाके में स्थित लतारडीह के पास स्थित सबर गाँव सोहदा में लोग तब आश्चर्य में पड़ गये, जब राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय की गाड़ी अचानक गाँव में पहुंची। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और गांववालों को यह जानकारी नहीं थी कि मंत्री गाँव आनेवाले हैं। सोहदा वही गाँव है, जहां के ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले राशन की मांग को लेकर प्रखण्ड कार्यालय में भिक्षाटन किया था।
रविवार दोपहर को जब मंत्री का वाहन सोहदा गाँव में पहुंचा तो वहां आंगनबाड़ी केंद्र में दो-तीन महिलाये ही मौजूद थीं। मंत्री के साथ मात्र एक अंगरक्षक, जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह और निजी सचिव थे। मंत्री के पहुँचने की खबर पाकर स्थानीय ग्रामीण उमापदो सबर पहुंचे। युवा उमपदो सबरों के कल्याण के लिए काम करते हैं। उन्होंने मीडिया और अन्य गाँववालों को बुलाया। खबर पाकर विभागीय अफसर भी दौड़े आये।
इमली के एक पेड़ के नीचे खाट लगी। मंत्री ने एक-एक कर गांववालों से पूछना शुरू किया। कितने परिवार हैं। किस-किस का कार्ड बना है। कार्ड का आवेदन दिया कि नहीं। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि आवेदन दे दिया है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई छूटे नहीं इसका ध्यान रखें। सभी का कार्ड बनना चाहिए। कार्ड बनने तक इन परिवारों को अनाज भी उपलब्ध कराने का आदेश उन्होंने दिया। साथ ही ग्रामीणों को राशन कैसे मिलेगा यह भी बताया। कहा, जागरूक रहें। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
आदिम जनजाति विकास केंद्र की रानी सबर यहाँ काफी सक्रिय हैं। उन्होंने मंत्री को स्थानीय समस्याओं की जानकारी दी। उमापदो ने बताया, सबरों का एकमात्र जाहेरथान इसी गाँव में बचा है। बाकी सबपर कब्ज़ा हो गया है। बीडीओ को लेकर भी लोगों में काफी शिकायतें और आक्रोश था। मंत्री ने कहा कि वे इन शिकायतों पर सम्बंधित उच्चाधिकारियों अधिकारियों से बात करेंगे। ग्रामीणों से कहा, पंचायती राज कायम हो गया है। यहाँ राजकुमार सिंह हैं। जिला परिषद के उपाध्यक्ष हैं। इनकी मदद लीजिये। मुखिया है, प्रमुख हैं, उनको पकड़िये। ये सब आपका काम करेंगे।
करीब एक घण्टे गाँव में गुज़ारने के बाद मंत्री सरयू राय जब गाँव से निकलने लगे तो उनके पीछे गाँववालों का हुजूम था उमापदो ने अफ़सोस जताया कि आपके आने की जानकारी नहीं थी। पहली बार कोई मंत्री आदिम जनजाति के इस गाँव में आया है। हम आपका स्वागत भी नहीं कर सके। श्री राय ने उसके कंधे पर हाथ रखा और बोले इसी तरह लोगों की सेवा करते रहो। मेरी जब जरूरत होगी मैं उपलब्ध रहूँगा। बिना किसी सुरक्षा और लव लश्कर के श्री राय की गाड़ी जब गाँव से चली, तो ग्रामीणों के चेहरे पर सन्तोष था और बाकियों की आँखों में सवाल कि क्या आज के जमाने में ऐसे मंत्री भी होते हैं!
