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Home » Jharkhand News रिम्स 2 का विवाद गहराया, चम्पाई सोरेन ने 24 अगस्त को नगड़ी के किसानों के साथ हल चलाने की घोषणा की
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Jharkhand News रिम्स 2 का विवाद गहराया, चम्पाई सोरेन ने 24 अगस्त को नगड़ी के किसानों के साथ हल चलाने की घोषणा की

BJNN DeskBy BJNN DeskAugust 19, 2025Updated:August 19, 2025No Comments4 Mins Read
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*सूर्या हांसदा आदिवासी थे, इसलिए उनका फर्जी एकाउंटर किया गया : चम्पाई सोरेन*

*पूर्व सीएम चम्पाई सोरेन ने हेमंत सरकार को “आदिवासी विरोधी” बताया; नगड़ी विवाद एवं सूर्या हांसदा एनकाउंटर पर कई गंभीर सवाल उठाये*

रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने राज्य की महागठबंधन सरकार को आदिवासी विरोधी बताते हुए, उसकी कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल उठाये। रांची में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने सरकार पर आदिवासियों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि वे रिम्स 2 के निर्माण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनका विरोध आदिवासी किसानों की जमीन को अनुचित तरीके से लेने के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास स्मार्ट सिटी में सैकड़ों एकड़ जमीन उपलब्ध है, तो फिर सरकार आदिवासियों की जमीन क्यों छीनना चाहती है? वहां अस्पताल बनाने में क्या समस्या है?

पूर्व सीएम ने कहा कि नगड़ी में किसानों ने पिछले साल तक खेती की थी, लेकिन अब उस जमीन पर तार की बाड़ लगाकर उन्हें जाने से रोक दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, जमीन का कोई अधिग्रहण नहीं हुआ है और न ही उन्हें कोई नोटिस दिया गया है। भाजपा नेता ने कहा कि खेती पर निर्भर किसानों को भूमिहीन नहीं किया जा सकता। अगर कोई अधिग्रहण हुआ है तो संबंधित विभाग उसकी जानकारी सार्वजनिक करे।

नगड़ी के किसानों का समर्थन करते हुए चम्पाई सोरेन ने घोषणा की है कि वे 24 अगस्त को ग्रामीणों के ‘हल जोतो, रोपा रोपो’ आंदोलन में शामिल होंगे और रिम्स 2 के लिए प्रस्तावित जमीन पर हल चलाएंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून, सीएनटी एक्ट और ग्राम सभा के नियमों का पालन नहीं किया गया है।

झारखंड आंदोलन के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान हमरा लक्ष्य झारखंड के आदिवासियों एवं मूलवासियों के अधिकारों की रक्षा करना था, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज उसी झारखंड में हमें आदिवासियों की जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। क्या इसी दिन को देखने के लिए अलग झारखंड राज्य बनाया गया था?

उन्होंने सवाल उठाया कि जब अधिग्रहण की कोई वैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है तो किसानों को खेती से रोकने का आदेश किस आधार पर जारी किया गया? उपजाऊ खेतिहर जमीन पर बाड़ किस के आदेश से लगाई गई? वो कौन लोग हैं जो आदिवासियों की जमीन छीनना चाहते हैं, उन्हें बेघर करना चाहते हैं?

ज्ञात हो कि नगड़ी के किसानों ने रविवार को पूर्व सीएम से मुलाकात कर आंदोलन में शामिल होने का न्योता दिया था। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी उपजाऊ जमीन पर बिना नोटिस और उचित प्रक्रिया के कब्जा कर रही है, जिसके कारण उनकी आजीविका पर संकट पैदा हो गया है।

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*सूर्या हांसदा के फर्जी एनकाउंटर की सीबीआई जांच हो*

पिछले दिनों गोड्डा में हुए सूर्या हांसदा के एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए पूर्व सीएम ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सूर्या आदिवासी था, इसलिए मार दिया। इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए, तभी पीड़ित परिवार को न्याय मिल पायेगा।

सूर्या हांसदा को समाजसेवी बताते हुए उन्होंने कहा कि जो शख्स विस्थापितों के अधिकारों के लिए लड़ रहा था, जिसने आदिवासी समाज की अगली पीढ़ी को शिक्षित बनाने का बीड़ा उठाया था, जो अधिकतर मामलों में बरी हो चुका था, उसके फर्जी मुठभेड़ ने झारखंड सरकार की “कथनी और करनी का सच” पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।

राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड में वीर सिदो-कान्हू के वंशजों पर हूल दिवस के दिन लाठी चार्ज होता है। वीर चांद-भैरव के नाम पर 350 गरीब बच्चों का स्कूल चलाने वाले का एनकाउंटर हो जाता है। बोकारो में आदिवासी समाज की बहु-बेटी से रेप करने का प्रयास वालों को ईनाम दिया जाता है, नौकरी दी जाती है। क्या यही अबुआ राज है?

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*झारखंड में आदिवासियों की स्थिति दयनीय*

आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि 1770 में बाबा तिलका मांझी, उसके बाद वीर सिदो कान्हू, भगवान बिरसा मुंडा, वीर पोटो हो आदि से लेकर आज दिशोम गुरु तक, हम लोग जल-जंगल-जमीन के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन हमारे समाज को क्या मिला? कहने को तो हम इस जमीन के मालिक हैं, लेकिन कड़वा सच यह है कि आज हम लोग राशन कार्ड से मिलने वाले 5 किलो चावल पर निर्भर हैं। उसके इंतजार में बैठे रहते हैं। इस परिस्थिति को बदलना होगा।

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आनंद किशोर बिहार झारखंड न्यूज़ नेटवर्क में कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे सामाजिक मुद्दों, जनहित और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि रखते हैं। आनंद का उद्देश्य कमजोर और जरूरतमंद लोगों की आवाज को सही मंच तक पहुंचाना है। वे निष्पक्ष, सरल और प्रभावशाली पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं।

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