रांची.
झारखंड पुलिस के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो गई है. वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा ने राज्य की पहली महिला नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है. उनके कार्यभार संभालते ही झारखंड पुलिस को पहली बार महिला नेतृत्व मिला है, जिसे प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.
इतिहास में दर्ज हुआ नया अध्याय
अब तक झारखंड पुलिस की कमान पुरुष अधिकारियों के हाथों में रही है, लेकिन तदाशा मिश्रा की नियुक्ति ने इस परंपरा को तोड़ते हुए इतिहास रच दिया है. उनकी यह उपलब्धि न केवल राज्य पुलिस के लिए गर्व का विषय है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत संदेश देती है.
प्रशासनिक मजबूती की उम्मीद
तदाशा मिश्रा को एक अनुभवी, अनुशासित और दृढ़ निर्णय लेने वाली अधिकारी के रूप में जाना जाता है. उनके डीजीपी बनने से राज्य में कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ करने, अपराध नियंत्रण को प्रभावी बनाने और पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता लाने की उम्मीद जताई जा रही है.
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महिला सुरक्षा और आधुनिक पुलिसिंग पर फोकस
नई डीजीपी से विशेष रूप से महिला सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण, आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग और जनसहभागिता को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है. साथ ही, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में भी उनके नेतृत्व को अहम माना जा रहा है.
पुलिस महकमे में सकारात्मक संदेश
तदाशा मिश्रा की नियुक्ति से पुलिस विभाग के भीतर भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है. पुलिस और प्रशासनिक हलकों में उनके नेतृत्व कौशल, कार्यशैली और अनुभव की सराहना की जा रही है. अधिकारियों और कर्मियों को विश्वास है कि उनके मार्गदर्शन में झारखंड पुलिस नई ऊंचाइयों को छुएगी.
महिला नेतृत्व को नई पहचान
लोगों का मानना है कि यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि समाज में महिला नेतृत्व को स्वीकार्यता और प्रोत्साहन देने का प्रतीक भी है. तदाशा मिश्रा की सफलता आने वाली पीढ़ी की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनेगी.

