
चतरा,
कोयला-आधारित लेकिन आकांक्षी जिला चतरा में सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की गई। सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (CEED) की ओर से टांडवा पंचायत भवन में सामुदायिक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें पंचायत प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, नागरिक समाज संगठन और स्थानीय समुदाय के सदस्य शामिल हुए।
इस परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य चतरा जैसे जिलों में आर्थिक विविधीकरण, वैकल्पिक आजीविका और समावेशी विकास की संभावनाओं पर संवाद स्थापित करना था। कार्यक्रम के दौरान हरित रोजगार, जलवायु-अनुकूल कृषि, कौशल विकास, महिलाओं की भागीदारी तथा डीएमएफटी (DMFT) और सीएसआर (CSR) संसाधनों के प्रभावी उपयोग जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम में CEED के निदेशक – जस्ट ट्रांजिशन अश्विनी अशोक ने कहा कि चतरा जैसे जिलों में जस्ट ट्रांजिशन का अर्थ कोयले से अचानक दूरी बनाना नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आर्थिक विविधीकरण और समुदाय-आधारित योजना से ही एक हरित और समावेशी अर्थव्यवस्था की नींव रखी जा सकती है।
CEED के हालिया अध्ययन के निष्कर्षों का हवाला देते हुए बताया गया कि कोयला खनन क्षेत्रों के आसपास आजीविका के विकल्प सीमित हैं, औपचारिक शिक्षा और कौशल विविधता की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। वहीं, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि-प्रसंस्करण, एग्रो-फॉरेस्ट्री, पर्यटन और लो-कार्बन एमएसएमई (MSME) को भविष्य के संभावित प्रमुख अवसरों के रूप में चिन्हित किया गया।
इस अवसर पर टांडवा की मुखिया सुनीता देवी, विभिन्न पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने चतरा में न्यायसंगत, समावेशी और सतत ऊर्जा संक्रमण के लिए बहु-पक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि स्थानीय जरूरतों और भागीदारी को केंद्र में रखते हुए चतरा जिले को सतत विकास और सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर किया जाएगा।


