
नयी दिल्ली।


राज्य के संसदीय कार्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री सरयू राय ने कहा है कि देश के पांच पूर्वी राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, छतीसगढ़ एवं ओड़िशा का विकास किए बिना रेड कॉरिडोर को समाप्त करने के प्रयास सार्थक रंग लाने में सफल नहीं हो सकते। श्री राय आज आउटलुक पत्रिका द्वारा इंडिया हैबिटैट सेंटर, नयी दिल्ली में आयोजित संवाद ‘लाल गलियारे में विकास’ के अवसर पर बोल रहे थे।
श्री राय ने कहा कि नक्सलवाद की समस्या सिर्फ प्रभावित राज्यों की लड़ाई नहीं है बल्कि यह पूरे देश की समस्या है। झारखण्ड, बिहार, बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ पाँचों राज्य रेड कॉरिडोर का हिस्सा हैं और ऐतिहासिक रूप से पिछड़ापन के शिकार हैं। देश के कुल प्राकृतिक संसाधनों का 65 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में पाया जाता है। लेकिन आजादी के पहले और बाद में भी सरकारों ने इस क्षेत्र की अनदेखी की। यहाँ के बन्दरगाहों का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के निकट होने का बावजूद हल्दिया, धमारा और पारादीप के बन्दरगाहों के बजाय इन देशों का ज्यादा कारोबार दक्षिण और पश्चिम के बन्दरगाहों से होता है। केंद्र सरकार की भाड़ा समानीकरण नीति के कारण यहाँ के कारण यहाँ का खनिज बाहर जाता रहा और बड़े उद्योग विकसित राज्यों में लगते रहे। यहाँ गरीबी और बेकारी बढ़ती रही और नतीजा नक्सलवाद के रूप सामने है। उन्होंने कहा कि अगर इस समस्या को खत्म करना है तो केंद्र सरकार को पहल करनी होगी और इन राज्यों को साथ लेकर प्रदूषण रहित सतत विकास की नीति बनानी होगी।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह, केंद्रीय मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद, श्री राजीव प्रताप रूडी, केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त यशोवर्धन आज़ाद, सांसद वीडी राम, केंद्रीय हिंदी विवि, वर्धा के कुलपति डॉ वीएन राय, आउटलुक पत्रिका के संपादक श्री आलोक मेहता आदि ने भी अपने विचार रखे।

