

राजेस तिवारी
पटना |

लोक आस्था का महापर्व छठ जो उत्तर भारत का सबसे खास पर्व माना जाता है जिसमें सूर्य की उपासना की जाती है और सबसे खास बात यह है कि इस पर्व में अस्ताचलगामी सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है और फिर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
किसी भी लोक परंपरा में एेसा नहीं है। सूर्य, जो रौशनी और जीवन के प्रमुखस्रोत हैं और ईश्वर के रूप में जो रोज सुबह दिखाई देते हैं उनकी उपासना की जाती है। इस महापर्व में शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ख्याल रखा जाता है और कहते हैं कि इस पूजा में कोई गलती हो तो तुरह क्षमा याचना करनी चाहिए वरनातुरत सजा भी मिल जाती है।शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाने के कारण कहते हैं छठ दीपावली के ठीक छः दिन बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को”सूर्य षष्ठी का व्रत” करने का विधान है।छठे दिन होने के कारण इसे आम बोलचाल में छठ पर्व कहा जाने लगा । इस दिन भगवान सूर्य व षष्ठी देवी की पूजा की जाती है, जिन्हेंउषआ (छठी मैया) कहा जाता है।भगवान सूर्य और छठी मईया की पूजा मान्यताओं के अनुसार छठी मइया और भगवान सूर्य की बहन हैं। इस पर्व के दौरान छठी मइया के
अलावा भगवान सूर्य की पूजा-आराधना होती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन दोनों की अर्चना करता है उनकी संतानों की छठी माता रक्षा करती हैं। छठ का व्रत सबसे कठिन व्रत माना जाता है। कहते हैं कि भगवान की शक्ति से ही चार दिनोें का यह कठिन व्रत संपन्नहोता है।
लोक संस्कृति और कृषि की उपयोगिता से भी जुड़ा है छठ
ये तो धार्मिक मान्यताएं हैं, लेकिन सूर्य की उपासना का यह पर्व लोक संस्कृति के साथ ही लोगों के दैनिक जीवन में काम आने वाली वस्तुओं के साथ भी जुड़ा है। उत्तर भारत कृषि प्रधान क्षेत्र है खासकर बिहार के लोगो का मुख्य पेशा अभी भी कृषि ही है। इसीलिए खेती किसानी से जुड़ा यह पर्व किसानों के काम आने वाली चीजों, नई फसल की उपज को लेकर जश्न मनाने से भी जुड़ा है।

