
जमशेदपूर।: समसामयिक कवि मंगलेश डबराल जी की स्मृति में निश्चय फाउंडेशन, महिला काव्य मंच एवं नन्हें रचनाकार ने संयुक्त रूप से “मंगलेश डबराल की कविताएं – स्मृति काव्य गोष्ठि” का आयोजन किया।
72 वर्षीय प्रख्यात साहित्यकार मंगलेश डबराल जी का निधन इसी माह कोरोना संक्रमण के कारण हो गया था। उनकी याद में आयोजित स्मृति काव्य गोष्टि में बच्चों व बड़ों ने शिरकत की, कार्यक्रम में भाग लेने के लिए शहर के कई हिंदी व अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के बच्चों ने मंगलेश डबराल जी की कविताओं का अध्य्यन किया था, उन्होंने अपनी पसंदीदा कविता का पाठ ऑनलाइन कार्यक्रम में बड़े ही रोचक तरीक़े से किया।

“लिखना चाहता हूँ / अ से अनार, अ से अमरूद/ लेकिन लिखने लगता हूँ /अ से अनर्थ, अ से अत्याचार”, ” माँ खुश होकर उनकी तरफ़ देखती / और जाते हुए भी उन्हें नमस्कार करती / हालाँकि वह उम्र में सभी लोगों से बड़ी थी।” ” सुबह की नींद आती है/ दुनिया के कामकाज लाँघती हुई/ ट्रेनें जा चुकी हैं, हवाई जहाज़ उड़ चुके हैं
/ सभाएँ-गोष्ठियाँ शुरू हो चुकी हैं” जैसे गंभीर जीवन मूल्यों वाले मंगलेश जी की कविताओं को बच्चों की आवाज़ में सुनना बेहद रोचक था। इस दौरान बच्चों व बड़ो ने मां का नमस्कार, पत्तों की मृत्यु, वर्णमाला, सुबह की नींद, पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, अंतराल, तुम्हारा प्यार, टॉर्च, मोबाइल जैसी दर्जनों कविताओं का पाठ किया।
कविता पाठ करने वाले सबसे छोटे प्रतिभागी लोयोला स्कूल के वर्ग प्रथम के सहज कलेर रहे, वही हिल टॉप स्कूल, टैगोर एकेडमी, तारापुर स्कूल,केरला समाजम मॉडल स्कूल, संत जोसफ स्कूल, उत्क्रमित उच्च विद्यालय लक्ष्मीनगर, नीलडीह मध्य विद्यालय एवं अन्य विद्यालयों के वर्ग प्रथम से लेकर दसवीं के 16 से ज्यादा बच्चों ने काव्य पाठ किया।
काव्य पाठ में आदित्य कुमार सिंह, एंजल रंधावा ,अदिति सिंह, आकांक्षा सिंह सिकरवार, आयुष सिंह, निकिता कुमारी, पिंकी कर मोदक, सुधा कुमारी, जूली कुमारी, ब्युटी कुमारी, मुस्कान कुमारी, रिचा कुमारी,अंशु कुमारी, श्रेया मिंज व अन्य बच्चो ने भाग लिया। वही चंदन मिश्रा, आशा पांडे, डॉली परिहार, मीना बाघ, अजित मिश्रा, पूजा कुमारी एवं अन्य बड़ों ने भी कविताएं पढ़ीं।
कार्यक्रम का संचालन पूनम महानन्द ने किया, वही कवि परिचय नन्हें रचनाकार पूजा महतो ने किया। पूजा कुमारी, आरती शर्मा, नेहा प्रजापति एवं तरूण कुमार बच्चों के मेंटॉर की भूमिका में रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य नन्हें रचनाकारों में सृजनशीलता और रचनात्मकता विकसित करना, देश की समृद्ध साहित्यिक विरासत से उन्हें रूबरू करवाना व साहित्य सरंक्षण और संवर्धन के लिए जागरूक करना है।

