
आदिवासी कुड़मी समाज ने दी श्रद्धांजलि, सरकार से की मांग


जमशेदपुर : अपने कुड़माली झुमर गीतों के माध्यम से झारखंड आंदोलन को एक दिशा देेनवाले आंदोलनकारी स्व. विजय महतो को राज्य स्थापना दिवस (15 नवंबर) पर मरणोपरांत ‘झारखंड रत्नÓ देने की मांग आदिवासी कुड़मी समाज ने राज्य सरकार से की है. समाज की ओर से स्थानीय स्वर्णरेखा निर्मल गेस्ट हाउस में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में आज उक्त मांग उठी. इस अवसर पर स्थानीय सहित झारखंड, उड़ीसा व पश्चिम बंगाल के कई जिलों के साहित्यिक, सांस्कृतिककर्मी, बुद्धिजीवि, समाजसेवी, राजनेता व सामाजिक संगठन के लोग मौजूद थे. पहले सत्र में श्रद्धांजलि देने के उपरांत दूसरे सत्र में कुड़मी समाज के कला संस्कृति व भाषा पर विचार विमर्श किया गया. इस दौरान स्व. विजय महतो की धर्मपत्नी वीणा महतो को समाज की ओर से सम्मानित किया गया.
मौके पर बतौर अतिथि साहित्यिक ललित महतो महतो (प. बंगाल), पूर्व सांसद शैलेन्द्र महतो, समाज के वरिष्ठ सदस्य आस्तिक महतो, डा. वीणापानी महतो आदि मौजूद थे. सभी अतिथियों ने एकस्वर में झारखंड आंदोलन तथा झुमर गीत-संगीत को एक नयी ऊंचाई पर पहुंचाने में विजय महतो के योगदान को अहम बताया. बताया कि उनके प्रयास से ही इस समाज की आवाज दिल्ली तक पहुंची. इसलिये राज्य सरकार को ‘झारखंड रत्नÓ देकर उनके योगदान को नमन करना चाहिये. मौके पर सुनिर्मल महतो, चंद्रावती महतो, चंपकलता महतो, अनिल महतो, मलय महतो, पम्पा महतो, अशोक महतो, संतोष महतो, साउरी महतो (उड़ीसा), सुधा महतो सहित कई गण्यमान्य लोग मौजूद थे. कार्यक्रम का संचालन झारखंड आंदोलनकारी हरमोहन महतो ने किया.
कई प्रस्ताव पारित
कार्यक्रम में कई प्रस्ताव पारित किये गये, जिसमें कुड़मियों की कला, संस्कृति, पर्व, त्यौहार व भाषा को बचाये रखने के लिये कला व संस्कृति बोर्ड गठन करने, राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में कुड़माली भाषा विभाग बनाने, कुड़माली भाषा को जनजातीय भाषा के रुप में मान्यता देने, बंगाल सरकार की तर्ज पर झारखंड में भी झुमर, छऊ नृत्य व विभिन्न कलाकर्मियों को हर माह मानदेय देने आदि की मांग शामिल है.

