जमशेदपुर।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य के राजनीतिक समीकरणों में हमेशा से अहम भूमिका निभाने वाले आदिवासी समाज का रुख अब स्पष्ट रूप से करवट ले रहा है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन की जंगलमहल क्षेत्र में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने इस इलाके का सियासी माहौल पूरी तरह से बदल दिया है। आदिवासी समाज अब खुले तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन में आता दिख रहा है।
पारंपरिक ग्राम प्रधानों और मार्गदर्शकों के साथ अहम मंथन
चम्पाई सोरेन ने झाड़ग्राम और जंगलमहल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांवों के मांझी बाबा, पारंपरिक ग्राम प्रधानों और आदिवासी समाज के प्रमुख मार्गदर्शकों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की। इस दौरान उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के पक्ष में सहयोग की अपील की। बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में आयोजित इस बैठक में आदिवासी समाज की स्थानीय चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर विस्तृत चर्चा हुई। चम्पाई सोरेन ने इस मौके पर जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल अब बदलाव की दहलीज पर खड़ा है और इसमें आदिवासी समाज की भूमिका सबसे निर्णायक साबित होगी।
टीएमसी सरकार पर दमन और झूठे मुकदमों का आरोप
बैठक के दौरान स्थानीय आदिवासी नेताओं और ग्राम प्रधानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पश्चिम बंगाल में आदिवासी समाज वर्तमान राज्य सरकार की नीतियों से बेहद त्रस्त है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सरकारी स्तर पर उनका लगातार प्रशासनिक दमन किया जा रहा है और उन्हें बिना किसी ठोस कारण के झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। अब जंगलमहल का आदिवासी समाज इन सब प्रताड़नाओं से पूरी तरह मुक्ति चाहता है।
एकलव्य मॉडल विद्यालयों के निर्माण में असहयोग का मुद्दा
शिक्षा के मुद्दे पर चम्पाई सोरेन ने राज्य की टीएमसी सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने ग्राम प्रधानों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के कार्यकाल में देश भर के आदिवासी विद्यार्थियों को मुफ्त और उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 723 ‘एकलव्य मॉडल विद्यालय’ स्वीकृत किए गए थे। इनमें से ज्यादातर स्कूल देश के अन्य हिस्सों में बनकर तैयार भी हो गए हैं। लेकिन, पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने इन विद्यालयों के निर्माण के लिए जमीन देने से ही साफ इनकार कर दिया। सोरेन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जानबूझकर आदिवासियों को शिक्षा और विकास की मुख्यधारा से दूर रखना चाहती है।
जंगलमहल में चम्पाई सोरेन की बढ़ती सक्रियता से भाजपा मजबूत
इस बैठक में आदिवासी समाज के सामाजिक और आर्थिक उत्थान से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दे भी उठाए गए। पूर्व सीएम ने उपस्थित लोगों को ठोस आश्वासन दिया कि राज्य में भाजपा की सरकार बनते ही इन सभी समस्याओं पर समुचित और त्वरित कार्यवाही की जाएगी। इस भरोसे के बाद आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने भाजपा को अपना पूर्ण समर्थन देने और विकास की मुख्य धारा से जुड़ने का वादा किया।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन जंगलमहल इलाके में अत्यधिक सक्रिय नजर आ रहे हैं। इस क्षेत्र में उन्होंने अब तक दर्जनों छोटी-बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं बंगाल भाजपा के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ मंच भी साझा किया है। उनके इन रणनीतिक और जमीनी प्रयासों के कारण झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में भाजपा की राजनीतिक स्थिति काफी मजबूत दिखाई दे रही है।





