खौफ के साए में कैसे हो भयमुक्त मतदान

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अजीत कुमार ,जामताड़ा

जान शान्शत में फंसी हो और मौत का साया सामने दिखे तो कैसे हो सकता है
भयमुक्त मतदान. जामताड़ा के मतदाता भी पेशोपेश की स्थिति में है. नक्सली
फरमान ने जामताड़ा के नारायणपुर प्रखंड के मतदाता को दहशत में ला दिया है.
लगातार दो दिनों तक पोस्टरबाजी कर नक्सलीओं ने न सिर्फ दमदार उपस्थिति
दर्ज करवाई है बल्कि सरकार के वोट प्रतिशत बढ़ने की मुहिम में दहशत की
दिवार खड़ी कर दी है. भयमुक्त मतदान करवाने की दिशा में नक्सलियों ने
पुलिस को खुली चुनौती दी है.

नारायणपुर मुख्य बाजार सहित कई जगहों पर नक्सलियों ने पोस्टरबाजी कर वोट
बहिष्कार का फरमान जारी किया है. ऑपरेशन ग्रीन हंट सहित १५ बिदुओं को
सूची जारी कर लोगो से मतदान से दूर रहने की बात कही है. पहले दिन
पोस्टरबाजी की घटना के बाद पुलिस की ओर से एलार्पी किया गया लेकिन जबतक
मतदाता पुलिस पर भरोसा कर पाते नक्सलियों ने दुसरे दिन भी करमदाहा रोड
में कई जगहों पर पोस्टरबाजी कर दहशत बरकरार रखते हुए अपने मनसूबे साफ़ कर
दिए है.

नारायणपुर का इलाका नक्सल प्रभावित गिरिडीह जिला के सीमा से सटा हुआ है.
गिरिडीह का तीन नक्सल प्रभावित थाना क्षेत्र गांडेय, अहिल्यापुर और
ताराटांड है. दूसरी ओर देवघर का भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र जामताड़ा से
सटा है. जबकि धनबाद जिला का भी अधिकाँश इलाका जो नक्सलियों के चपेट में
है नारायणपुर सीमा से लगा हुआ है. भौगोलिक दृष्टि से नारायणपुर नक्सलियों
के लिए मायने रखता है.

पुर्व में मदन पाण्डेय की हत्या से इलाके में नक्सलियों ने पाँव पसारे,
फिर नारायणपुर के ही देवालवारी पुलिस पिकेट उड़ाकर मजबूत उपस्थिति दर्ज
करवाई. समय-समय पर नक्सलियों ने क्षेत्र में पोस्टरबाजी कर मौजूदगी का
एहसास करवाया है. गौरतलब है की विगत ५ वर्ष के भीतर जामताड़ा में कई बार
विस्फोटक का जखीरा बरामद किया गया. उन विस्फोटको का इस्तेमाल नक्सली बड़ी
घटना को अंजाम देने में उपयोग करते है. पुलिस ने इस बात को साबित किया है
लेकिन नक्सल अभियान के तहत अब तक जामताड़ा पुलिस को कोई बड़ी उपलब्धि हाथ
नहीं लगी है.

बहरहाल इस फरमान का असर कितना होगा, वोटिंग प्रतिशत कितना बढ़ पायेगा यह
तो २४ अप्रैल के मतदान में पता चलेगा. पर इतना तो स्पष्ट है की
पोस्टरबाजी की घटना से मतदाता और पुलिस की नींद उड़ गई है.

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