Anni Amrita
जमशेदपुर.
जमशेदपुर के गोलमुरी में स्थित होटल विवांटा में सचिव अमरजीत के नेतृत्व में ट्रांस समुदाय के हित के लिए कार्यरत ‘उत्थान सीबीओ’ संस्था के एडवाइजरी बोर्ड की बैठक हुई.इस बैठक में ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े मुद्दों पर पैनल डिस्कशन के साथ-साथ चर्चा हुई कि कैसे झारखंड में ट्रांसजेंडर समुदाय के हित के प्रति समाज और सरकार आगे आए.
कार्यक्रम में विधायक मंगल कालिंदी और पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे और अमरजीत को ऐसे सराहनीय कार्यक्रम के लिए धन्यवाद दिया.कुणाल षाड़ंगी ने अपने संबोधन में कहा कि आज यह समुदाय राजनीति से लेकर फैशन तक के क्षेत्र में अपना परचम लहरा रहा है.समाज को अपनी सोच बदलने की जरुरत है और वह पहले से काफी बदली भी है.मगर इस दिशा में लगातार प्रयास करने की जरुरत है.कुणाल ने आश्वस्त किया कि वे ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी तक पहुंचाएंगे और संस्था से जुड़े लोगों की अगले महीने उनसे मुलाकात सुनिश्चित करवाएंगे.
कार्यक्रम के दौरान ट्रांसजेंडर समुदाय के स्वास्थ्य, कानूनी स्थिति और हकीकत,मानसिक स्वास्थ्य व अन्य विषयों को लेकर एक पैनल डिस्कशन का आयोजन हुआ.इसमें आरएसबी कंपनी की एचआर जया, ट्रांस समुदाय से शकीला नायक,डालसा सचिव धर्मेंद्र कुमार,एडवोकेट रविन्द्र कुमार,टाटा स्टील फाउंडेशन से शालिनी कुजूर, समाजसेवी पूर्वी घोष,डाॅ स्नेहा झा और मनोवैज्ञानिक काउंसिलर अजिताभ गौतम ने भाग लिया.
आरएसबी की एचआर जया ने कहा कि बच्चे अगर तृतीय लिंग को ‘छक्का’ बोलते हैं तो यहां सोचनेवाली बात यह है कि ऐसा बोलना उनको सिखाता कौन है?जरुरी है कि न सिर्फ कंपनियां सीएसआर(काॅरपोरेट सोशल रिस्पाॅन्सिबिलिटी) करें बल्कि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभाए और ISR यानि इंडीविजुअल सोशल रिस्पाॅन्सिबिलिटी निभाए.जया ने कहा कि आज सब संकल्प लें कि वे अपने-अपने स्तर पर स्कूल काॅलेजों में जाकर equality पर बात करें..
समाजसेवी पूर्वी घोष ने कहा कि सोच बदलनी जरुरी है,तभी समाज बदलेगा.ईश्वर ने ही तृतीय लिंग की भी रचना की है, फिर भी लोग ऐसे बच्चे को त्याग देते हैं.अगर घर से न त्यागा जाए तो आगे कोई समस्या आएगी ही नहीं..एडवोकेट रविन्द्र ने बताया कि कैसे समय समय पर वे ट्रांस समुदाय को कानूनी रुप से जागरुक करते हैं.उन्होंने कहा कि जागरुकता में नुक्कड़ नाटकों की बड़ी अहमियत होती है जिसके माध्यम से ट्रांसजेंडर समुदाय के हित में जागरुकता अभियान चलाया जा सकता है.
मनोवैज्ञानिक काउंसिलर अजिताभ गौतम ने कहा कि सोशल स्टिग्मा की वजह से लोग अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुक नहीं है.ट्रांसजेंडर समुदाय में यह जागरुकता और भी कम है,जबकि उस समुदाय के साथ पल प्रति पल होनेवाला भेदभाव व अन्यायपूर्ण व्यवहार उनके आत्मसम्मान को मारने लगता है.इससे मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.हालांकि किसी भी व्यक्ति का ‘होना’ ही सम्मानीय होना चाहिए न कि लिंग से यह तय हो,मगर समाज उतना जागरुक नहीं है.इसलिए ट्रांसजेंडर समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है.
कार्यक्रम का संचालन हिमांशी और अमरजीत ने किया.कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अन्नी अमृता, माही किन्नर,रजिया किन्नर व अन्य लोग शामिल हुए.कार्यक्रम के आयोजन में अर्पित पांडेय की महती भूमिका रही.






