
जमशेदपुर के बारीडीह निवासी बेटी कामिनी सिंह उड़ीसा राज्य के सुदूर और अति पिछड़े जिलों में पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रही है। शहर के एसडीएसएम स्कूल में पढ़ी बढ़ीं
सुश्री कामिनी सिंह उड़ीसा के रायगड़ा ज़िले में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को लेकर अनुकर्णीय कार्य कर रही हैं। बीते दो वर्षों के दरम्यान उन्होंने झारखंड में वनाधिकार अधिनियम को लेकर जनजातीय और वनवासियों के मध्य कई जागरूकता अभियान भी चलाए थे। रायगड़ा स्थित जेके पेपर्स कंपनी की सीएसआर इकाई स्पर्श के साथ संयुक्त रूप से स्थानीय जनजातीय युवाओं में निरंतरता के साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चला रही हैं। हाल ही में दिल्ली में संपन्न द क्लाइमेट रियलिटी प्रोजेक्ट के तहत उन्हें ट्रेनर की उपाधि मिली है। उन्होंने रायगड़ा में ग्रीन स्कूल कैंपस अभियान की शुरूआत की है जिसमें स्कूलों को हरित अभियान से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण को बल दे रहीं है। इसमें स्कूली बबच्चों और शिक्षकों को पर्यावरण संस्कृति को पुनर्परिभाषित करते हुए पर्यावरण संरक्षण और बचाव के नये और कारगर उपाय ढूंढने के लिए दक्ष बनाया जाता है। ग्रीन कैम्पस अभियान के तहत स्कूलों को जल, जैव विविधता, ऊर्जा दक्षता का अनुकूलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे बच्चों को ईको फ्रेंडली संस्कृति और मौसम परिवर्तन के प्रति शिक्षित और जागरूक किया जा रहा है। कामिनी सिंह के प्रयास से उड़ीसा के रायगड़ा जिले में ही अबतक 100 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और कई स्कूल ग्रीन कैम्प्स अभियान से जुड़ रहे हैं। जमशेदपुर की बेटी कामिनी महिला सशक्तिकरण की अप्रतिम उदाहरण हैं। कामिनी ने बताया कि उनका लक्ष्य है कि जमशेदपुर के भी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों को ग्रीन कैम्पस अभियान से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में तेज़ी से जागरूक किया जाये। सुश्री कामिनी सिंह “यूनाइटेड नेशन्स एनवायरनमेंट प्रोग्राम” और “यूनाइटेड नेशन्स इंस्टिट्यूट फ़ॉर ट्रेनिंग एंड रिसर्च” की प्रमाणित पर्यावरण कार्यकर्ता हैं।



