
जमशेदपुर के युवा सिख धर्म प्रचारक एवं विचारक हरविंदर सिंह जमशेदपुरी अपने 20 दिवसीय धार्मिक प्रचार प्रवास के बाद मलेशिया से स्वदेश लौट आए हैं। इस यात्रा ने न केवल उनके व्यक्तिगत अनुभवों को समृद्ध किया, बल्कि प्रवासी सिख समुदाय की सिखी, गुरबाणी और गुरमत के प्रति अटूट निष्ठा को भी उजागर किया। रविवार को वे जमशेदपुर पहुंचे, जहां सोमवार को उन्होंने स्थानीय सिख समाज के साथ अपने अनुभव साझा किए।


मलेशिया के सिखों की सेवा भावना
अनुभव साझा करते हुए जमशेदपुरी ने कहा कि मलेशिया में रहने वाले सिख समुदाय में सेवा, समानता और आध्यात्मिक अनुशासन का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। उन्होंने बताया कि वहां के सिख गुरुद्वारों में गुरबाणी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ लंगर, सेवा और संगत की परंपरा पूरी श्रद्धा से निभाई जाती है। राजनीति से ऊपर उठकर गुरु घर की सेवा करना वहां के सिखों की पहचान है।
गुरमत प्रचार से जुड़ा युवा उत्साह
जमशेदपुरी, जो जमशेदपुर के गुरमत प्रचार सेंटर से जुड़े हैं, ने बताया कि मलेशिया के विभिन्न गुरुद्वारों में आयोजित प्रचार सभाओं में सिख युवाओं और परिवारों की विशेष भागीदारी रही। गुरबाणी और गुरमत को समझने की उनकी उत्सुकता यह दर्शाती है कि सिख धर्म की जड़ें विदेशों में भी उतनी ही मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी सिख गुरु नानक देव जी के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में आत्मसात कर एक आदर्श समाज का निर्माण कर रहे हैं।
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“सेवक बनकर सेवा करना ही सिखी”
हरविंदर सिंह जमशेदपुरी ने कहा, “मलेशिया के सिखों में सेवा भावना और गुरमत के प्रति सम्मान अद्भुत है। वहां गुरुद्वारों में पद नहीं, बल्कि सेवा को महत्व दिया जाता है।” उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि गुरुघर के प्रबंधक स्वयं को प्रधान नहीं, बल्कि सेवक मानते हैं, जो सिख धर्म की मूल भावना को सशक्त बनाता है।
जमशेदपुर में हुआ भव्य स्वागत
जमशेदपुर लौटने पर सिख नौजवान सभा और गुरमत प्रचार सेंटर के पदाधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। साकची गुरुद्वारा के ग्रंथी जत्थेदार ज्ञानी जरनैल सिंह ने उनके मलेशिया दौरे की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास सिख युवाओं को नई दिशा और प्रेरणा देते हैं। उन्होंने जमशेदपुरी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि उनकी यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
वैश्विक स्तर पर सिखी की मजबूती
यह यात्रा सिख धर्म की वैश्विक उपस्थिति को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। जमशेदपुरी ने युवाओं से अपील की कि वे सेवा, समानता और भाईचारे के संदेश को विश्वभर में फैलाएं। मलेशिया जैसे देशों में सिखों की सक्रिय भूमिका न केवल धार्मिक एकता को बढ़ावा देती है, बल्कि विश्व शांति और मानवीय मूल्यों को भी सशक्त करती है।


