
जमशेदपुर।

युवाओं ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और भगवान शिव के प्रति अपनी गहरी आस्था से एक मिसाल कायम की है। शहर के राहरगोड़ा इलाके के रहने वाले युवा राइडर आशीष झा और उनके साथी विष्णु शर्मा ने अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से महज 28 दिनों के भीतर देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की कठिन और लंबी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। जब मन में बाबा भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था हो, तो राह की हर बाधा अपने आप दूर हो जाती है, इन दोनों युवाओं ने इस बात को पूरी तरह से सच साबित कर दिखाया है।
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12 हजार किलोमीटर से अधिक का रोमांचक सफर
आशीष और विष्णु की यह महायात्रा कोई साधारण सफर नहीं था। आशीष ने बताया कि इस पूरी धार्मिक यात्रा के दौरान दोनों ने बुलेट से लगभग 12,225 किलोमीटर की दूरी तय की। इस पवित्र यात्रा का शुभारंभ 3 मई को जमशेदपुर से किया गया था। चिलचिलाती धूप, बारिश और दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना इन युवाओं ने अपना सफर जारी रखा और देश के अलग-अलग कोनों में स्थित सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए।
इन 12 ज्योतिर्लिंगों में टेका माथा
जमशेदपुर से निकलने के बाद इन दोनों शिवभक्तों ने सबसे पहले झारखंड के देवघर स्थित बाबाधाम के दर्शन किए। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश में काशी विश्वनाथ, मध्य प्रदेश में महाकालेश्वर और ओमकारेश्वर पहुंचे। वहां से उनका सफर महाराष्ट्र की ओर गया, जहां उन्होंने घृष्णेश्वर, त्र्यंबकेश्वर और भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में पूजा-अर्चना की। महाराष्ट्र के बाद उन्होंने गुजरात के सोमनाथ और नागेश्वर में माथा टेका। इसके बाद दक्षिण भारत का रुख करते हुए आंध्र प्रदेश में मल्लिकार्जुन और तमिलनाडु में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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रुड़की के पास हुआ हादसा, सेफ्टी जैकेट बनी रक्षक
इस लंबी यात्रा में उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां भी आईं। आशीष ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि रामेश्वरम से केदारनाथ जाने के रास्ते में उत्तराखंड के रुड़की के पास हाईवे पर अचानक रास्ता संकरा हो गया, जिसके कारण उनकी बुलेट दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में आशीष के हाथ में चोट आई। हालांकि, उन्होंने पूरे सफर में सेफ्टी जैकेट पहन रखी थी, जिसने उनकी जान बचा ली और शरीर पर कोई गंभीर चोट नहीं आई, जिससे एक बहुत बड़ा हादसा टल गया। दुर्घटना के बाद बुलेट क्षतिग्रस्त हो गई थी, लेकिन सर्विस सेंटर वालों की मदद से तुरंत दूसरी बुलेट का इंतजाम हो गया। इसके बाद दोनों अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़े और 27 मई को बाबा केदारनाथ के दर्शन कर अपनी यात्रा पूर्ण की।
स्थानीय लोगों का मिला भरपूर प्यार और सहयोग
28 दिनों की इस लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा को सफल बनाने में देश भर के स्थानीय लोगों की भी अहम भूमिका रही। आशीष और विष्णु ने बताया कि इस सफर में जहां भी वे गए, उन्हें रहने और खाने-पीने के लिए वहां के स्थानीय लोगों का भरपूर प्यार और सहयोग मिला।


