
जमशेदपुर।

झारखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) अभियान के बीच पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त (DC) राजीव रंजन ने जिले के सभी नागरिकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वोटर लिस्ट के इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए कोई भी व्यक्ति फर्जी या अनाधिकृत दस्तावेज न बनवाए और न ही ऐसा करने का प्रयास करे। उपायुक्त ने दो टूक कहा है कि जाली दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों और उनका इस्तेमाल करने वाले नागरिकों के खिलाफ कानून की सुसंगत धाराओं के तहत त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी प्रमाण-पत्र बनाने वाले गिरोहों का हुआ है खुलासा
इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला निर्वाचन पदाधिकारी राजीव रंजन ने बताया कि हालिया दिनों में राज्य के कई जिलों से ऐसे सनसनीखेज मामले सामने आए हैं, जहां सक्रिय साइबर गिरोह फर्जी वेबसाइट्स के जरिए लोगों के जाली जन्म प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज तैयार कर रहे थे। इन खुलासों के बाद पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन और पुलिस का तकनीकी तंत्र पूरी तरह हाई अलर्ट पर आ गया है।
सक्रिय हो सकते हैं जाली दस्तावेज बनाने वाले दलाल
उपायुक्त ने बताया कि वर्तमान में जिले भर में एसआइआर (SIR) की आधिकारिक प्रक्रिया तेज गति से चल रही है। इस पुनरीक्षण कार्य में मतदाताओं को अपनी पहचान, पते और जन्मतिथि के सत्यापन के लिए कई तरह के वैध दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ रही है। इसी मजबूरी का फायदा उठाने के लिए फर्जी प्रमाण-पत्र बनाने वाले दलाल और साइबर गिरोह सक्रिय हो सकते हैं। ये लोग जल्द काम कराने का झांसा देकर आम जनता को फर्जी वेबसाइट्स से निकले जाली डॉक्युमेंट्स थमा सकते हैं।
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आम जनता से अपील: शॉर्टकट के चक्कर में न पड़ें
जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने जिले के सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे किसी भी दलाल या शॉर्टकट के चक्कर में पड़कर अपना भविष्य खतरे में न डालें। हमेशा केवल सरकार के आधिकारिक प्रज्ञा केंद्रों (CSC) या संबंधित विभागीय कार्यालयों से निर्गत वैध दस्तावेजों का ही उपयोग करें। प्रशासन ने हिदायत दी है कि जांच के दौरान यदि किसी भी मतदाता के दस्तावेज जाली पाए गए, तो सिर्फ बनाने वाले गिरोह ही नहीं, बल्कि उस दस्तावेज का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।


