जमशेदपुर। लौहनगरी जमशेदपुर के साकची स्थित गुरुद्वारा साहिब में रविवार, 12 अप्रैल को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा। सिख धर्म की अमूल्य परंपरा और गुरबाणी की मधुर वाणी से साध-संगत को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर करने के महान उद्देश्य से गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, साकची द्वारा प्रातःकालीन “आसा की वार कीर्तन दरबार” का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह विशेष और पावन समागम गुरुद्वारा साहिब साकची के प्रांगण में सुबह 4:30 बजे से शुरू होकर 6:30 बजे तक चलेगा। शहर भर से श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बनने के लिए अहले सुबह गुरु घर में एकत्रित होंगे।
अमृतवेला परिवार का कीर्तनी जत्था करेगा निहाल
इस आध्यात्मिक दरबार में विशेष रूप से आमंत्रित सुप्रसिद्ध गुरसिख कीर्तनी जत्था ‘अमृतवेला परिवार’ अपनी मधुर गुरबाणी और शबद कीर्तन की प्रस्तुति से उपस्थित संगत को निहाल करेगा। प्रभात बेला (अमृतवेला) में होने वाला यह आयोजन सिख परंपरा के अनुरूप आत्मिक शांति, नाम सिमरन और गुरु भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। मान्यता है कि अमृतवेला में किया गया नाम सिमरन सीधे परमात्मा तक पहुंचता है। आसा की वार सिखों का एक प्रमुख प्रातःकालीन प्रार्थना पाठ है। जब शांत वातावरण में हारमोनियम और तबले की थाप पर इसका गायन होता है, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। साकची गुरुद्वारा में होने वाला यह आयोजन शहरवासियों के लिए किसी बड़ी आध्यात्मिक सौगात से कम नहीं है।
प्रधान निशान सिंह ने की भारी संख्या में पहुंचने की अपील
आयोजन की तैयारियों और इसके महत्व को लेकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, साकची के प्रधान निशान सिंह ने संगत को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “आसा की वार केवल एक कीर्तन नहीं है, बल्कि यह गुरबाणी के माध्यम से हमारी सोई हुई आत्मा को जागृत करने का एक दिव्य अवसर है। हम सभी को अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर प्रभात बेला में गुरु घर पहुंचना चाहिए और इस पावन रस का आनंद लेना चाहिए।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे धार्मिक समागम समाज में आध्यात्मिक चेतना, आपसी प्रेम और एकता की भावना को मजबूत करते हैं। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में, जहां जीवन की रफ्तार काफी तेज है, ऐसे धार्मिक आयोजनों से लोगों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
युवा पीढ़ी को सिख इतिहास और संस्कृति से जोड़ने की अहम पहल
निशान सिंह ने शहर की पूरी साध-संगत से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर गुरबाणी से जुड़ें और अपने जीवन को गुरमत मार्ग पर चलाने का संकल्प लें। साकची गुरुद्वारा कमिटी के इस आयोजन के माध्यम से न केवल धार्मिक आस्था को बल मिलेगा, बल्कि आज की नई पीढ़ी और युवाओं को भी गुरबाणी, कीर्तन और समृद्ध सिख संस्कृति से जोड़ने का यह एक बेहद महत्वपूर्ण प्रयास है। गुरुद्वारा कमिटी द्वारा संगत की सुविधा के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस रविवार के आयोजन को सफल बनाने के लिए कमिटी के सभी सदस्य और सेवादार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। आयोजन को लेकर पूरे साकची, आमबगान, काशीडीह और आस-पास के क्षेत्रों की सिख संगत में विशेष उत्साह और भारी श्रद्धा का माहौल देखा जा रहा है। कार्यक्रम के समापन पर गुरु का अटूट लंगर और कड़ाह प्रसाद भी बरताया जाएगा।






